गीडा प्रशासन की ओर से सीईटीपी/ एसटीपी बनाने के लिए 35 लाख रुपये दिए गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में गीडा प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है। आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष ने देरी पर आपत्ति जताई है।
अभी हाल में एमएमएमयूटी में कराई गई एक जांच में आमी नदी के पानी में तेजाब की मात्रा खतरनाक स्थल पर पायी गई। आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाने के साथ गीडा के उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन इसके बाद भी गीडा प्रशासन की ओर सेे यहां के उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। हालांकि गीडा प्रशासन ने इसके लिए पहल तो की है, लेकिन पांच महीने बाद भी शून्य वाली स्थिति है।
आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि फंड मिलने के पांच महीने के बाद भी गीडा प्रशासन की ओर से सीईटीपी का काम नहीं शुरू किया जाना पूरी तरह से लापरवाही है। हालांकि उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी में बताया गया है कि सीईटीपी/ एसटीपी बनाने के लिए की जिम्मेदारी जल निगम को दी गई है, जिसके अंतर्गत कंसलटेंसी, डीपीआर बनाना, ईआईए और प्रोजेक्ट इम्पिमेंटेशन के लिए पहली किस्त के रूप में 35 लाख रुपये दे दिया गया है। डीपीआर मिलने के बाद एनजीआरबीए के अंतर्गत धन के आवंटन के लिए भेजा जाएगा। साथ ही बताया कि गीडा से निकलने वाला उत्प्रवाह निर्मित मास्टर ड्रेन से होते हुए सरैया नाले में जाता है।