सिद्धार्थनगर। फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी के मामले में प्रदेश भर में सुर्खियां बटोर चुका जिले का बेसिक शिक्षक विभाग एक बार भी चर्चा में है। नया मामला शासन की रोक के बावजूद उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित और विज्ञान विषयों में नए शिक्षकों की भर्ती करने का है। एडी बेसिक की जांच में बीएसए और संबंधित पटल के लिपिक दोषी पाए गए हैं। इसकी रिपोर्ट एडी बेसिक ने शासन को भेज दी है।
शिक्षा अनुभाग के विशेष सचिव ने 14 फरवरी 2019 को सभी बीएसए को पत्र जारी कर कहा था कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गणित और विज्ञान विषय के लिए शासन की ओर से नई नियुक्ति पर 8 जून 2018 में ही रोक लगा दी गई है। बावजूद इसके शासनादेशों को दरकिनार कर दो नियुक्तियां कर दी गईं। मामला संज्ञान में तब आया जब शिकायत के आधार पर एडी बेसिक डॉ. सत्यप्रकाश त्रिपाठी इसकी जांच करने 28 मार्च को सिद्धार्थनगर बीएसए कार्यालय पहुंचेे। जांच में उन्होंने पाया कि नई नियुक्तियों में अनियमितता बरती गई है। शासनादेशों और उच्चाधिकारियों के आदेशों को ताक पर रखकर नियुक्ति की गई है। वर्ष 2016 में ही सूची के क्रम संख्या 1-108 तक के अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा चुकी है। कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सात मार्च 2019 को नौ अभ्यर्थियों को दरकिनार करते हुए सीधे क्रमांक 118 पर अंकित कुलदीप कुमार, इसके बाद चार और अभ्यर्थियों को किनारे कर 123वें क्रम पर रहे राहुल मिश्रा को नियुक्ति दे दी गई। इतना ही नहीं, इनसे अधिक मेरिट रखने वाले अभ्यर्थियों को न तो कोई सूचना दी गई और न ही काउंसलिंग कराई गई।
एडी बेसिक डॉ. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि बीएसए सहित जितने भी लोग नियुक्ति में शामिल हैं। वे सब दोषी पाए गए हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।