काश यहां न जन्म लेते तो आज हम भी होते शादीशुदा
- पिछड़ेपन की वजह से कोई अपनी बेटी का यहां नहीं करता ब्याह
- आजादी के 71 साल बाद भी पड़री के ओलीपुर टोले में नहीं पहुंची बिजली
- शादी की उम्र पार कर चुके युवकों की संख्या है 40 से अधिक
अमर उजाला ब्यूरो
हाटा (कुशीनगर)। ओलीपुर हाटा तहसील क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत पड़री का एक टोला है, लेकिन पिछड़ेपन ने इसे इस तरह से जकड़ा है कि गांव के अधिकांश युवक इस बात पर अफसोस करते हैं कि वे यहां के निवासी हैं। दरअसल, आजादी के 71 साल बाद भी इस टोले में बिजली नहीं पहुंची है। यहां के लोग आज भी लालटेन और ढिबरी के भरोसे हैं। इस वजह से कोई लड़की वाला इस गांव में अपनी बेटी का ब्याह नहीं करना चाहता। गांव में शादी की उम्र पार कर चुके युवकों की संख्या 40 के पार है। इनमें से कुछ की उम्र 30 साल से अधिक है तो कुछ 35 के ऊपर पहुंच रहे हैं।
ओलीपुर की आबादी करीब 400 है। टोले में 70 परिवार रहते हैं। टोले से महज 200 मीटर की दूरी से हाईटेंशन लाइन गुजरी है, लेकिन बिजली इस टोले के नसीब में नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से वंचित मजरे और पुरवों में विद्युतीकरण की योजना संचालित की जा रही है, लेकिन ओलीपुर पर अब तक जिम्मेदारों की नजरें इनायत नहीं हुई है। यहां के लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए भी दूसरे गांव और बाजारों का रुख करना पड़ता है।
टोले की रहने वाली फूलमति देवी ने कहा कि यहां के लोग बिजली नहीं होने का दंश झेल रहे हैं। हम लोग सामाजिक रूप से उपेक्षित हैं। दूसरे गांव के लोग अपनी बेटियों की शादी इस टोले में नहीं करना चाहते। बच्चों की शादी की उम्र निकल जाती है और मां-बाप अफसोस करने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। टोले में 40 से अधिक युवक ऐसे हैं, जिनकी शादी की उम्र निकल चुकी हैं। वे आज भी इस इंतजार में हैं कि एक दिन उनके घर भी दुल्हन आएगी। बुजुर्ग बादामी देवी ने कहा कि अब तो उन्हें लगता है कि टोले में बिजली से जलने वाला बल्ब देखे बिना ही इस दुनिया से रुखसत हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि रात को दूसरे टोले में बिजली की रोशनी देखकर मन में टीस उठती है। युवक रामू ने कहा कि उनकी परेशानी पर कोई ध्यान नहीं देता। न तो जनप्रतिनिधि सुनते हैं और न ही बिजली निगम के अफसर। रामसेवक का कहना है कि आज भी टोले के लोग लालटेन युग में जिंदगी गुजारने को विवश हैं। कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से विद्युतीकरण की मांग की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।