गोरखपुर। जिले की चार महिलाएं नसबंदी के बाद भी गर्भवती हो गईं। अनचाहे गर्भ से बेचैन इन महिलाओं ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग में दर्ज कराई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच शुरू कर दी गई है। अगर जांच में विभाग की गलती सामने आई तो स्वास्थ्य महकमे की ओर से इन्हें 30-30 हजार रुपये का मुआवजा देना होगा।
खजनी के खुटहन की पीड़िता ने अक्टूबर 2009 में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में लगे कैंप में नसबंदी कराई थी । नसबंदी के बाद वह गर्भ न ठहरने को लेकर आश्वस्त थीं। हालांकि बाद में गर्भ ठहर गया। बड़हलगंज के बैसूलिया निवासी महिला ने अक्टूबर 2012 में उरुवा स्वास्थ्य केंद्र पर लगे कैंप में नसबंदी कराई थी। अब गर्भ ठहरने से वह और उनके परिवार के लोग परेशान हैं। इसके अलावा संतकबीरनगर के हैंसर बाजार निवासी महिला ने अक्टूबर 2014 में बांसगांव में लगे शिविर में नसबंदी कराई।
तीन साल बीत जाने के बाद जांच में पता चला कि महिला को गर्भ ठहर गया है। इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की गई। जगदीशपुर रहने वाली महिला की दिसंबर 2015 में खोराबार स्वास्थ्य केंद्र नसबंदी कराई थी। अब गर्भ ठहरने से वह परेशान है।
ये मामले संज्ञान में हैं। ऐसा होने के 90 दिनों के अंदर पीड़ित महिलाएं सीएमओ कार्यालय में दावा दाखिल कर दें तो जांच के बाद उन्हें 30 हजार रुपये का मुआवजा प्रदान करने का प्रावधान है। इन सभी मामलों की जांच शुरू हो गई है।
डॉ. नंद कुमार, एसीएमओ