समझनी होगी बच्चों के मन की बात
स्कूल में बच्चों के साथ बढ़ती घटनाओं से चिंतित हैं अभिभावक
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गुरुग्राम के प्रद्युम्न की दरिंदगी से की गई हत्या और अब स्कूल टीचर की प्रताड़ना से नवनीत के आत्मघाती कदम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। स्कूल में वे बच्चे को बेहतर तालीम के लिए भेजते हैं, मगर उन्हें अब कलेजे के टुकड़ों की सलामती की फिक्र सताने लगी है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि बच्चों की सहनशीलता कम होती जा रही है। बच्चे टीचर की डांट-मार को लेकर बहुत संवेदनशील हो जाते हैं। उनसे बराबर संवाद बनाकर उनके मन की बात समझने की कोशिश करनी चाहिए। इस मुद्दे पर अभिभावकों की राय कुछ यूं रही।
ऐसी घटनाओं से बढ़ गया है डर
स्कूल में लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से मन में डर बढ़ गया है। मेरे दो बच्चे हैं, वे जब तक स्कूल में रहते है घर में मन नहीं लगता। मैं बच्चों से रोजाना स्कूल में गुजरे पलों के बारे में पूछती हूं।
- शाहिन बानो, बिलंदपुर
इस घटना से सबक लेने की जरूरत
नवनीत की खुदकुशी की घटना सुनकर हतप्रभ हूं। डर लगने लगा है कि बच्चों के मन में कौन सी बात बैठ जाए और वे गलत निर्णय न ले लें। स्कूल प्रबंधन को इन घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है।
- सारिका देवी, सूर्यकुंड
स्कूल भेजकर निश्चिंत नहीं रह सकते
पहले स्कूल भेजकर हम निश्चिंत रहते थे, पर अब बच्चों की फिक्र बनी रहती है। लगातार ऐसी घटनाएं होने के बाद भी स्कूल में प्रताड़ना खत्म नहीं हो रही है। ये गंभीर बात है। इस पर ध्यान देना होगा।
- पिंटू जायसवाल, बैंक रोड
इन घटनाओं ने डरा दिया
एक बार मेरी बेटी घर पर आकर रोने लगी। बहुत पूछने पर उसने बताया कि मैडम ने डांटा है, जबकि मेरी गलती नहीं थी। इसके बाद मैंने मैडम से बात की और बेटी को भी समझाया। इन घटनाओं ने वाकई डरा दिया हैै।
- सुशील पांडेय, दक्षिणी बेतियाहाता