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रेलवे की सुस्ती से लटके अंडरपास

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गोरखपुर।
शहर की बढ़ती आबादी के चलते रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज और अंडरपास की जरूरतें बढ़ती जा रही हैं। मौजूद समय में कौवाबाग, सूरजकुंड, तरंग और नंदानगर में अंडरपास की सख्त जरूरत है, लेकिन रेलवे की रेलवे की उदासीनता और प्रदेश सरकार से तालमेल न बनने से अंडरपास निर्माण को गति नहीं मिल सकी है। जहां 13 करोड़ बजट स्वीकृत होने के बाद भी पौने दो साल से कौवाबाग अंडरपास का निर्माण लटका पड़ा है वहीं सूरजकुंड और तरंग अंडरपास की पहल सर्वे के बाद आगे नहीं बढ़ सकी है।

डिजाइन और टेंडर में बदलाव से लटका कार्य
कौवाबाग रेलवे क्रासिंग के लिए रेल मंत्रालय ने नवंबर 2015 में ही बजट स्वीकृत कर दिया। तीन बार टेंडर जारी कर निरस्त किया जा चुका है और टेंडर फाइनल होने के बाद भी डिजाइन में संशोधन किए जाने से भी विलंब हुआ है। इस रूट से रोजाना 40 से 45 मालगाड़ी और करीब सवा सौ ट्रेनें गुजरती हैं। वहीं यार्ड के पास क्रासिंग होने से अक्सर इंजन की शंटिंग भी होती है और आए दिन लोग आधे घंटे तक फंसे रहते हैं।
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12 फीट गहराई में बनेगा अंडरपास
कौवाबाग अंडरपास बाक्स पुशिंग तकनीकी से बनेगा। इस तकनीकी के तहत स्टील फ्रेम के दो बड़े बाक्स को रेलवे लाइन की जमीन के अंदर मशीन से प्रेशर देकर घुसाएंगे। बाक्स की मिट्टी निकालकर अंडरपास बनाना शुरू कर देंगे। पूरा निर्माण होने के बाद बाक्स को आगे बढ़ाएंगे। इसी तरह पूरा अंडरपास बनकर तैयार हो जाएगा। सपोर्ट के लिए बाक्स के बगल में गार्डर लगेगा। सड़क से चार मीटर गहरा और छह मीटर चौड़ा बनेगा। इसकी लंबाई 47 मीटर होगी। अंडरपास को टू लेन किया जाएगा ताकि आराम से गाड़ियां आ जा सकें। बरसात में पानी जमा होने पाए इसके लिए पंपिंग सेट लगाए जाएंगे। नई डिजाइन के मुताबिक अंडरपास से निकली सड़क और मोहद्दीपुर से अंडरपास तक बनने वाली साइड लेन बनाने के लिए सीसीएम (मुख्य वाणिज्य प्रबंधक) दफ्तर परिसर के पार्क का आधा हिस्सा लिया जाएगा।
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कोट
कौवाबाग अंडरपास के निर्माण के लिए जीएसटी के मुताबिक फिर से टेंडर निकाला गया है। टेंडर फाइनल कर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। तरंग और सूरजकुंड अंडरपास के लिए ज्वाइंट सर्वे हो चुका है। राज्य सरकार इस मामले में प्रस्ताव भेजे, इसके बाद विचार किया जाएगा।
संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर
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