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डिग्री, मेडल पाकर चहके मालवीयंस

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गोरखपुर।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में डिग्री और मेडल पाकर मेधावियों के चेहरे खिल उठे। समारोह के बाद सबने हिप...हिप... हुर्रे के नारे लगाए। साथ ही उत्तरीय, मालवीय टोपी और भारतीय वेशभूषा के परिधान हवा में उछाले। मैदान में ग्रुप फोटो भी कराए। सेल्फी ली और अलविदा मालवीय यूनिवर्सिटी बोलकर रवाना हो गए। परिवार और सगे-संबंधियों के साथ पहुंचे ज्यादातर मेधावियों ने कहा कि कैंपस लाइफ मिस करेंगे।
दीक्षांत समारोह का उद्घाटन राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्राविधिक शिक्षामंत्री आशुतोष टंडन, कुलपति प्रो. एसएन सिंह और एकेटीयू के पूर्व कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान ने किया। फिर दीक्षांत भाषण हुआ। कुलपति ने यूनिवर्सिटी की उपलब्धियां गिनाईं। इसके बाद 372 छात्र-छात्राओं को डिग्री देकर भविष्य में बेहतरीन कामकाज करने की शुभकामना दी गई। इसमें 241 लड़के और 131 लड़कियां शामिल रहीं। आईटीआरसी हॉल में टॉपरों को एक-एक कर मंच पर बुलाया गया। सबको राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने गोल्ड मेडल दिया। डिग्री और श्रेष्ठ छात्र या फिर छात्रा का सर्टिफिकेट उपलब्ध कराया। उत्साह भी बढ़ाया। राज्यपाल ने कहा कि देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। यह काम उन्हें बखूबी करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंजीनियर ही विकास योजनाओं में तेजी ला सकते हैं। ऐसा हुआ तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। युवा देश और समाज को आगे लेकर जाना चाहते हैं।
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दोपहर 2:15 बजे शोभायात्रा से शुरू हुआ समारोह अपराह्न 4:30 बजे तक चला। हॉल से छात्र-छात्राएं बाहर निकलीं से मौज-मस्ती में खो गए। हॉल के बाहर ही दोस्त और फैमिली के साथ ग्रुप फोटो लेने का लंबा सिलसिला चला, फिर बीटेक लेट्रल इंट्री, एमटेक, एमसीए और एमबीए के छात्रों ने खुशी का इजहार किया। सभी एक जगह एकत्रित हुए और जोर से बोले ... हिप... हिप हुर्रे। फिर बोले, यह खुशी का यादगार तरीका है।

राज्यपाल बोले, मेडल में लड़कियां सिर्फ दो पायदान पीछे
पढ़ाई, रिसर्च में लड़कियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। बेटियां हर फील्ड में आगे हैं। यूनिवर्सिटी से 65 फीसदी लड़के और 35 फीसदी लड़कियों को डिग्री मिली है लेकिन मेडल के मामले में यह आंकड़ा बदल गया है। लड़कियां सिर्फ दो पायदान पीछे हैं। 14 में से आठ लड़के और छह लड़कियों को गोल्ड मेडल मिले हैं।

एमटेक, एमसीए और एमबीए के गोल्ड मेडलिस्ट
- रोहित पटेल, मो. सलीम आजाद, ऋतु राय, दुर्गेश प्रसाद मिश्रा, पूजा वर्मा, विद्या श्रीवास्तव, आकृति पांडेय, श्रेय कसेरा, नीलेश आनंद श्रीवास्तव, सौरभ कुमार पांडेय, रवि शंकर राय, कृति श्रीवास्तव, अनुमिता अग्रवाल और गौरव कुमार कौशल।


‘जॉब क्रिएटर बनें युवा’
एकेटीयू के पूर्व कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान ने कहा कि युवाओं को अब जॉब क्रिएटर बनना होगा। डिग्री लेकर नौकरी के पीछे भागने से काम नहीं चलेगा। जॉब क्रिएटर बनकर ही देश, समाज के लिए कुछ किया जा सकता है। जब तक हम देश का हाथ मजबूत नहीं करेंगे, तब तक गर्व से नहीं कह सकते कि हम इंजीनियर हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों को बेहतर बनाने के लिए कारपस फंड जुटाने की राय दी। साथ ही कहा कि तकनीकी शिक्षा, शोध की गुणवत्ता सुधार कर लाखों लोगों का रोजगार बचाया जा सकता है। तमाम ऐसे इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेज हैं, जिनके बंद होने का खतरा है।

लाडलों पर नाज, बताई मेहनत, संघर्ष की कहानी

गौरव कुमार कौशल
एमसीए - 89.6 फीसदी
जन्मदिवस 19 अप्रैल 1995
जॉब - सिस्टम इंजीनियर, टीसीएस, त्रिवेंद्रम
लायक औलाद ही मां बाप की पूंजी
किसी मां बाप की संपत्ति उसकी औलाद ही होती है, अगर वह काबिल निकल जाए तो जीवन सफल हो जाता है। हमें ये मौका मेरे बेटे गौरव ने दिया। इससे बड़ी खुशी की कोई और बात नहीं हो सकती है। मंच पर राज्यपाल की हाथों सम्मानित होता देख सीना फक्र से ऊंचा हो गया है। रूदौली, फैजाबाद में लैब टेकनीशियन अशोक कुमार के बेटे गौरव कुमार कौशल को एमसीए की परीक्षा में 89.6 फीसदी नंबर हासिल कर टॉप किया है। बेटे की उपलब्धि पर खुशी को जाहिर करते हुए अशोक कुमार ने बताया कि उनकी पढ़ाई के दौरान कई उतार चढ़ाव आए। किसान पिता ने काफी संघर्ष किया, मगर एक समय के बाद मैं आगे पढ़ाई नहीं कर सका, मगर अपने बेटे की पढ़ाई में कभी रुपयों को रूकावट नहीं बनने दिया। पत्नी रत्ना कौशल ने बराबर सहयोग दिया।


मो. सलीम आजाद
एमटेक हिल एरिया- 80.2 फीसदी
जन्मदिवस - 15 अगस्त 1988
पीएचडी की तैयारी

महरूम मां बाप को समर्पित है गोल्ड मेडल
मंच पर जैसे ही एमटेक हिल एरिया के टॉपर मो. सलीम आजाद का नाम गोल्ड मेडल के लिए पुकारा गया। ऑडिटोरियम में मौजूद दो बहनें हुमा और हिना चहक उठीं। भाई को सम्मानित होते देख दोनों की आंखें भर आईं। खुद को संभालते हुए अल्लाह को शुक्रिया कहा। गोरखपुर के आवास विकास कॉलोनी निवासी दोनों बहनों ने बताया कि पिता शौकत अली और मां अख्तर जहां के गुजरने के बाद बहनों सलमा, जेद्दा और उन दोनों ने मिलकर भाई को संभाला। पांच भाई-बहनों में एकलौता सलीम शुरू से ही पढ़ाई में तेज रहा है। उससे बेहतर की उम्मीद थी और उसने कर दिखाया।

पूजा वर्मा
एमटेक कंप्यूटर साइंस - 92 फीसदी
जन्मतिथि - 10 दिसंबर 1991
जॉब - असिस्टेंट प्रोफेसर, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, अंबेडकरनगर

शुरू से ही मेधावी है मेरी बेटी
बेटी को गोल्ड मेडल मिलने पर विमला देवी ने खुशी का इजहार करते हुए बताया कि मेरी बेटी शुरू से ही क्लास टॉपर रही है। टॉप करना उसकी आदत में शुमार हो गया है। ये आदत मेरे चारों बच्चों को है। पूजा परिवार में एकलौती बेटी है। उन्होंने बताया कि पति जगदीश प्रसाद वर्मा लघु सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर हैं। पूरा परिवार इस उपलब्धि से उत्साहित है। पूजा ने बताया कि वह आगे चलकर प्रोफेसर बनना चाहती है। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने अभी एक पड़ाव हासिल किया है। आगे भी ये सफर यूं ही जारी रहेगा।


अनुमिता अग्रवाल
एमबीए - 95.6 फीसदी
जन्मतिथि - 24 फरवरी 1994
जॉब- एमएमएमयूटी में गेस्ट फैकल्टी

बेटी को बनाना है काबिल
एमबीए टॉपर अनुमिता के पिता अनूप कुमार एसबीआई में डिप्टी मैनेजर हैं। बशारतपुर निवासी मां नमिता ने बताया कि उनका सपना था कि बेटी पढ़-लिखकर आगे बढ़े और अपने सपनों को जी सके। आज इस बात की खुशी है कि बेटी ने उस तरफ पहला कदम बढ़ाया है। बेटी का माथा चूमते हुए नमिता ने बताया कि बेटी अपने पैर पर खड़ी हो तो उसे शादी के बाद भी किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए हमेशा कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि छोटी बेटी अंशिता भी सीए की पढ़ाई कर रही है। वहीं बेटा अमन स्कूल में हैं। अनुमिता ने बताया कि वो टीचिंग लाइफ में ही कॅरिअर बनाना चाहती हैं।

आकृति पांडेय
एमटेक - 92.5 फीसदी
जन्मदिवस - 08 दिसंबर 1991
रिसर्च में संभावनाएं तलाशने की तैयारी

पत्नी की खुशी में शामिल हुए पति
आकृति पांडेय को जब राज्यपाल के हाथों मेडल मिला तो पति प्रतीक का चेहरा गर्व के भाव से भर गया। यही वह क्षण था जिसके आकर्षण में वह रायपुर से पत्नी आकृति को लेकर गोरखपुर खिंचे चले आए थे। तीन माह पूर्व प्रतीक मिश्र आकृति के जीवनसाथी बने। पत्नी के साथ उनकी खुशी में शरीक होते हुए उन्होंने ने कहा, ‘लग रहा है कि जैसे मैंने ही टॉप किया है’। आकृति ने बताया कि रिसर्च के क्षेत्र में कुछ ऐसा करने का मन है ताकि लोग उन्हें याद रखें। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के दौरान गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत तलाशने की सोच है। अब रिसर्च इसी दिशा में आगे बढ़ाऊंगी। पिता इंजीनियर आरसी पांडेय और माता कंचन पांडेय के बिना इस कामयाबी की कल्पना भी नहीं कर सकती थी।

निलेश आनंद श्रीवास्तव
एमटेक - 90.8
जन्मदिवस - 03 जुलाई 1991
एमटेक- डिजिटल सिस्टम

गांव का नाम बढ़ाया
निलेश आनंद श्रीवास्तव की कामयाबी पर पिता विनोद श्रीवास्तव और माता अनीता गदगद नजर आए। निलेश ने भी कामयाबी का श्रेय माता-पिता को दिया। बताया कि अब वह चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में शोध करना चाहते हैं। पिता ने बेटे की मेधा पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि निलेश ने जिस तरह बलरामपुर के उतरौला तहसील के छोटे से बड़हरा भिटौरा का नाम रोशन किया है, अब उसी तरह वह एक दिन देश का नाम रोशन करेगा। इलाहाबाद में सरकारी नौकरी करने वाले विनोद ने बताया कि बेटे ने कभी मेहनत से किनारा नहीं किया। लगन और ईमानदारी से पढ़ाई कर उसने आज यह मुकाम हासिल कर हमारा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

रामानुजम हॉस्टल का किया लोकार्पण
राज्यपाल राम नाईक और सीएम योगी आदित्यनाथ ने दीक्षांत समारोह में शामिल होने से पूर्व कैंपस में नवनिर्मित 240 कमरों के ब्वॉयज हॉस्टल का लोकार्पण किया। इसका लाभ बीटेक और एमटेक को मिलेगा। वर्तमान में हॉस्टलों कम होने से एक कमरे में तीन से चार विद्यार्थी रहने का मजबूर हैं। इस दौरान प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन और प्राविधिक शिक्षा सचिव भुवनेश्वर कुमार, कुलपति प्रो. एसएन सिंह भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री को सौंपा पांच लाख का चेक
बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ मालवीय यूनिवर्सिटी के शिक्षकोें और कर्मचारियों ने अपने एक दिन का वेतन दान किया है। इसके तहत 5 लाख 11 हजार 242 रुपये इकट्ठा हुए हैं। समारोह के दौरान कुलपति प्रो. एसएन सिंह ने इसका चेक मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ को सौंपा।

कुलपति ने दिया स्मृति चिह्न
समारोह के दौरान कुलपति प्रो. एसएन सिंह ने राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, जीएलए यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान, प्राविधिक शिक्षा सचिव भुवनेश्वर कुमार को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

हर कोर्स के टॉप तीन हुए सम्मानित
एमबीए, एमसीए, एमटेक में प्रथम तीन स्थान हासिल करने वाले मेधावियों को राज्यपाल ने सम्मानित किया। पहला स्थान हासिल करने वालों को गोल्ड मेडल, दूसरा और तीसरा स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट दिया गया।
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इन्हें मिला सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट
सानू कानू बनिया, नवीन सिंह, निशांत श्रीवास्तव, राघवेंद्र यादव, आराधना गिरी, नितेश गुप्ता, अमर दीप पांडेय, मो. रिजवान, राहुल मिश्रा, श्रेष्ठा मिश्रा, अंकिता सिंह, आदित्य कुमार नाईक, रजत कुमार, आकांक्षा सिंह, अविनाश साहू, अतीत कुमार श्रीवास्तव, उपासना वर्मा, अंकिता श्रीवास्तव, रूपम श्रीवास्तव, रिया सिंधू, सुकृति यादव, शालिनी कसेरा, मानसी सिंह, कुमारी उवर्शी तिवारी, नंदिनी राय, पूजा श्रीवास्तव, शिखा, नमिता श्रीवास्तव।
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