अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
शिक्षाविद व समाजसेवी प्रेमचंद श्रीवास्तव का शनिवार दोपहर 2 बजे 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। मूलत: सिकरीगंज के मानिकपार गांव के रहने वाले प्रेम चंद श्रीवास्तव ने रैंपस शिक्षा संस्थान की स्थापना के साथ ही समाजसेवा में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
गोरखपुर में प्रेक्षागृह के निर्माण के अभाव में नाट्य संस्थाओं के साथ संगीत एवं अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन के लिए रैंपस स्कूल के परिसर में रतन मंच का निर्माण कराया। उन्होंने गोरखपुर थिएटर एसोसिएशन की स्थापना करने के साथ नाट्य संबंधी संसाधन उपलब्ध कराके हर महीने एक नाट्य प्रस्तुति से रंगमंच में जान फूंकने का काम किया। मीडिया सेंटर की स्थापना करके पत्रकारिता के संवर्धन के लिए भी आगे आए। विगत कुछ माह पहले प्रथम लिटेरेरी फेस्ट में उन्हें उनके विभिन्न सामाजिक सरोकारों के लिए प्राइड ऑफ गोरखपुर एवार्ड के साथ विभिन्न अन्य राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनका अंतिम संस्कार राजघाट स्थित मुक्तिधाम पर रविवार दोपहर एक बजे किया जाएगा। निधन की सूचना पाते ही लोगों में शोक की लहर दौड़ गई और उनके आवास पर संवेदना व्यक्त करने गोरखपुर स्कूल एसोसिएशन से डॉ. संजयन त्रिपाठी, संगम मिश्र, डॉ. भारत भूषण, डॉ. शरद मणि त्रिपाठी, रविशंकर खरे, बच्चू लाल, डॉ. आशीष श्रीवास्तव आदि पहुंचे।
संस्कार भारती ने दी श्रद्धांजलि
प्रेमचंद श्रीवास्तव के निधन पर संस्कार भारती की आपात बैठक बुलाई गई। इसमें प्रेमचंद श्रीवास्तव के निधन को कला और संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया। गोरखपुर थिएटर एसोसिएशन के रवींद्र रंगधार, मानवेंद्र त्रिपाठी, श्रीनारायण पांडेय, आसिफ जहीर और अजीत प्रताप सिंह ने उन्हें रंगमंच को पुन: जीवित करने वाला मसीहा बताया।