रेल ट्रैक का दोहरीकरण, विद्युतीकरण और स्टेशनों पर रूट रिले इंटरलॉकिंग जैसे योजनाओं के बलबूते ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की रेलवे की कोशिश कामयाब नहीं सकी है। ट्रेनों की स्पीड बढ़ने की बजाय चाल सुस्त हो गई है। करीब 30 फीसदी ट्रेनें रोजाना लेट होती हैं। इनमें सबसे ज्यादा ट्रेनें वाराणसी मंडल की हैं। ट्रेनों के देर से चलने के कारण एक तरफ जहां यात्रियों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं वहीं रेलवे के खजाने को भी चपत लग रही है।
समय से ट्रेनों के संचालन को लेकर रेलवे बोर्ड ने भी गाइड लाइन जारी कर रखा है। सभी जोन को 90 फीसदी ट्रेनों को समय से चलाने का लक्ष्य दिया गया है। पूर्वोत्तर रेलवे में समय पालन की स्थिति बेहद खराब है। ट्रेनों के देर से चलने के कारण यात्रियों का बुरा हाल है। गर्मी में ट्रेनों के खड़े होने पर यात्री उबल जा रहे हैं। सोमवार को भी वैशाली एक्सप्रेस, गोरखधाम एक्सप्रेस, एलटीटी एक्सप्रेस, पूर्वांचल एक्सप्रेस सहित गोरखपुर से होकर गुजरने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनें रोजाना तीन घंटे तक देरी से चलीं। जानकारों का कहना है कि मालगाड़ी की बढ़ी रेक और मंडल मुख्यालय के बीच अपनी सीमा में आने वाली ट्रेनों को समय से गुजारने को लेकर बढ़ी खींचतान के चलते ऐसे हालात बने हैं।
खाली रेक की अधिकता के चलते ट्रेनों के समय पालन में दिक्कत आ रही है। समय को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन के मुताबिक ट्रेनों को चलाने में सफलता मिल जाएगी।
- संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर
बढ़ी मालगाड़ी की रेक, ड्राइवर की भी कमी
पूर्वोत्तर रेलवे में मालगाड़ी की रेक बढ़ने से भी ट्रेनों को समय से गुजारने में दिक्कतें आ रही हैं। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि दूसरे जोन की खाली मालगाड़ी को पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से भेज दिया जा रहा है। इससे स्टेशन और आउटर पर लाइन खाली नहीं मिल पा रही है और एक्सप्रेस ट्रेनों को भी रोकना पड़ रहा है। वहीं बड़ी रेक के मुताबिक क्रू (ड्राइवर) की उपलब्धता भी कम है।
29 अप्रैल को ट्रेनों की स्थिति
मंडल कुल ट्रेनें विलंब प्रतिशत
वाराणसी 93 34 63
लखनऊ 109 26 76
इज्जतनगर 37 04 89
30 अप्रैल को ट्रेनों की स्थिति
मंडल कुल ट्रेनें विलंब प्रतिशत
वाराणसी 99 27 72
लखनऊ 99 25 74
इज्जतनगर 30 01 97