गोरखपुर। नगर निगम बोर्ड की बैठक तीखी नोकझोंक और विवादों के बीच हुई। निगम के पूर्व उपसभापति और पार्षद जियाउल इस्लाम और पार्षद जनार्दन चौधरी के बीच बैठक में विवाद हो गया। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
पार्षदों ने बीच बचाव कर मामला शांत कराया। हंगामे के बाद मेयर ने बैठक को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। दोबारा शुरू हुई बैठक में 265 करोड़ का बजट पास हुआ।
बृहस्पतिवार को मेयर डॉ. सत्या पांडेय की अध्यक्षता में नगर निगम बोर्ड की 14वीं बैठक हुई। बैठक शुरू होते ही मनोनीत पार्षद शिवाजी शुक्ला ने पूर्व मनोनीत पार्षद हरख चंद्र निषाद के निधन पर कार्यकारिणी की बैठक में शोक सभा नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए बोर्ड बैठक स्थगित करने की मांग की, जिस पर पार्षद जनार्दन चौधरी, देवेद्र पिंटू, हाजी शकील ने समर्थन किया।
हालांकि अन्य पार्षद विकास कार्य की बात को रखते हुए बैठक कराने के पक्ष में थे, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। इसी बीच पूर्व उपसभापति और पार्षद जियाउल इस्लाम तथा पार्षद जनार्दन चौधरी आपस में उलझ गए। दोनों ने एक दूसरे को देख लेने की धमकी भी दे डाली। इसी दौरान पार्षद धर्मदेव चौहान ने टेबल पर रखा माइक तोड़ दिया और हंगामा करने लगे।
पार्षदों के व्यवहार से नाराज मेयर डॉ. सत्या पांडेय ने कहा कि पार्षद नहीं चाहते की विकास हो, हर बार बोर्ड की बैठक इसी तरह हंगामा करते हैं। पार्षद रमेश गुप्ता ने पूर्व मनोनीत पार्षद हरख चंद्र निषाद के निधन पर शोक सभा न होने पर कड़े शब्दों में निंदा की, जिसके बाद शोक सभा हुई। इसके बाद मेयर ने 15 मिनट के लिए बैठक को स्थगित कर दिया।
दूसरी बार बैठक शुरू होने पर सबसे अहम मुद्दा बजट रहा। कार्यकारिणी का पूरा जोर बजट को पास कराने पर था। बैठक में पार्षद विकास कार्यों में देरी, पार्षदों के वरीयता कार्य, छुट्टा पशुओं का मामला, शवगृह, सदन का भवन को लेकर लंबी लिस्ट तैयार कर रखी थी। लेखाधिकारी बृजेश सिंह ने 265 करोड़ का बजट पेश किया।
बजट पेश करते हुए पूर्व सभापति और पार्षद जियाउल इस्लाम ने बजट में भवन निर्माण राशि एक करोड़ से बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद आंशिक संशोधन करते हुए भवन निर्माण की धनराशि एक करोड़ से बढ़ाकर ढाई करोड़ रुपये कर दी गई। तीन बजे कुछ पाषदों को बोलने का मौका नहीं मिलने पर हंगामा करने लगे।
इस पर मेयर ने बोर्ड की बैठक समाप्त करने की घोषणा करके सीट से उठ गई। अपनी बात नहीं रख पाने वाले पार्षदों ने मेयर को घेर लिया। पार्षद हंगामा करने लगे जिसके बाद मेयर को दूसरे रास्ते से जाना पड़ा।
सांड़ का मुद्दा छाया रहा
पार्षद राजेश जायसवाल, संजय सिंह सांड़ों को लेकर नगर निगम की तरफ से क्या कार्रवाई की जा रही है, इस संबंध में नगर आयुक्त से सवाल किए। इस पर नगर आयुक्त राजेश कुमार त्यागी ने बताया कि उनके पास जो जमीन है वहां 100 सांड़ ही रखे जा सकते हैं। जिलाधिकारी से जमीन देने की मांग की गई है जमीन मिलते ही सांड़ों को वहां भेजा जाएगा।
इंटरलाकिंग सड़क में बन गए गड्ढे
रुस्तमपुर वार्ड के पार्षद संजय सिंह ने बगहा बाबा रोड से सिद्धार्थपुरम में बनाई गई इंटरलाकिंग सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाया है। कहा कि इंटरलाकिंग सड़क बनाए जाने के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर आपत्ति की गई थी।
इसके बावजूद सड़क का निर्माण कर दिया गया और भुगतान हो गया। उन्होंने बताया कि जिस ठेकेदार ने सड़क बनाई थी उसे उनके वार्ड में फिर काम मिला था लेकिन उस काम की फाइल गायब हो गई थी। संजय सिंह ने सदन में प्रस्ताव रखा कि नाली निर्माण में सफेद बालू की जगह मोरंग का इस्तेमाल किया जाए। अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर विचार करने की बात कहीं।
निगम की जमीन पर कब्जे का मुद्दा
वार्ड नंबर 12 के पार्षद वीर सिंह सोनकर ने नगर की जमीन मौजा लच्छीपुर में अवैध कब्जा किए जाने की जांच कराकर जमीन वापस कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व बोर्ड की बैठक में पास न होने पर अपनी नाराजगी जताई।
शवगृह और सदन भवन का रहा मुद्दा
पूर्व उपसभापति और पार्षद जियाउल इस्लाम ने शवगृह के निर्माण में नियमों में ढिलाई देने और सदन भवन के निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से रखता। दोनों में हो रही देरी पर उन्होंने नाराजगी जताई।
जिस पर नगर आयुक्त राजेश कुमार त्यागी ने बताया कि सदन भवन के निर्माण का नक्शा पास होने के लिए गया है लेकिन कुछ उसमें कमियां है जिसके लिए जीडीए वीसी, नगर आयुक्त और एक लोगों के बीच कमेटी बनी है। जिसकी मंजूरी के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
वार्ड नंबर 65 के सभी कार्यों की हो जांच
वार्ड नंबर 65 के पार्षद विजय राज ने वार्ड में हुए सभी कामों की जांच कराने की मांग की। मेयर ने सहायक नगर आयुक्त स्वर्ण सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और निर्माण विभाग सहायक अभियंता वीसी पटेल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी जांच के लिए बना दी। 21 दिन के अंदर कमेटी को रिपोर्ट देनी होगी।
बेटे के साथ सदन में रहे पार्षद
वार्ड नंबर 65 के पार्षद विजय राज बेटे के साथ सदन में पहुंचे। जब तक सदन की कार्रवाई चली उनका बेटा माइक पर कुछ न कुछ बोलता रहा। इसकी वजह से कई बार सदस्यों को अपनी बात रखने में दिक्कत हुई।