गोरखपुर। आवास आयुक्त अजय चौहान ने शाहपुर आवास विकास कालोनी में अवैध ढंग से आवंटित पट्टे निरस्त करने के आदेश दिए हैं। अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जीडीए और जिला प्रशासन ने कालोनी की सड़क की जमीन पर पट्टा आवंटित कर दिया था। यही नहीं, अवैध रूप से आवंटित पट्टे पर प्रधानमंत्री आवास भी बनवा दिए गए। इन्होंने सड़क के अलावा कालोनी का पार्क भी गलत तरीके से बेचा था। आवास आयुक्त ने पार्क को खाली कराने का आदेश दिया है। इसके अलावा अवैध रूप से आवंटित पट्टे की जमीन पर रहने वाले स्वीपर और बाल्मीकि समाज के लोगों को दूसरी जगह बसाने के आदेश दिए हैं।
आवास आयुक्त अजय चौहान ने अवैध ढंग से आवंटित पट्टे निरस्त करने के आदेश के साथ ही परिषद के स्थानीय अफसरों से कहा है कि पट्टा निरस्तीकरण का पत्र जल्द ही जिलाधिकारी को भेजा जाए। आवास विकास कॉलोनी में साल 2008-09 में सड़क की भूमि पर गलत तरीके से पट्टा किया गया और पार्क बेचा गया था। यह मामला ‘अमर उजाला’ ने अप्रैल-2018 में प्रमुखता से उठाया था। सिलसिलेवार बताया गया था कि गड़बड़ी कहां कहां हुई है। आवास आयुक्त की ओर से की गई कार्रवाई से अमर उजाला की मुहिम परिणाम तक पहुंच गई है। आवास आयुक्त ने मूल नक्शे के हिसाब से सड़क की चौड़ाई 30 मीटर करने के आदेश दिए हैं। आयुक्त के मुताबिक सड़क के प्रारंभिक भाग पर आवास विकास परिषद का स्टोर है, जिसे हटाकर 66 मीटर लंबाई तक सड़क की चौड़ाई 30 मीटर की जाए। यह चौड़ाई अभी 12 मीटर है। सड़क की भूमि पर हुए अवैध निर्माण भी हटाए जाएं।
पट्टों की फाइल गायब
आवास विकास कॉलोनी शाहपुर में जीडीए ने जिलाधिकारी की मदद से 24 लोगों को अवैध तरीके से पट्टा आवंटित करा दिया था। छानबीन हुई तो पता चला कि पट्टा आवंटन से संबंधित फाइलें गायब हैं। इसके बावजूद मनमानी की गई और अवैध तरीके से आवंटित पट्टे की भूमि पर पीएम आवास बनवा दिया गया। अब इन आवासों का निर्माण अवैध हो गया है। इन्हें ढहाने की तैयारी है।
नक्शा बदलकर बेचा था पार्क
शाहपुर आवास विकास कॉलोनी 21 हेक्टेयर में विकसित की गई है। प्लाटिंग के बाद करीब 350 आवंटियों ने आवास बनवाए और वहां रह रहे हैं। दो कतारों (भवन संख्या ए-24 से ए-39 तक और बी-124 से 247) के बीच दो पार्क छोड़े गए थे। बाद में परिषद के अफसरों ने नक्शा बदला और पार्क की भूमि को बेच दिया। इस पर जनसेवा समिति आवास विकास कॉलोनी शाहपुर ने आपत्ति जताई और मामले की शिकायत आवास आयुक्त से की। समिति ने कहा कि पार्क की भूमि बेची नहीं जा सकती है, जिसे आयुक्त ने सही माना।
18 मीटर सड़क की भूमि पर अवैध पट्टा
कॉलोनी में 30 मीटर सड़क बनाई जानी थी लेकिन इसका अनुपालन नहीं हुआ। भवन संख्या बी-124 से 247 के बीच 12 मीटर सड़क बनाकर छोड़ दी गई। साथ ही 18 मीटर सड़क की भूमि पर अवैध पट्टा आवंटित कर दिया गया। नियमानुसार, सड़क की भूमि पर पट्टा नहीं हो सकता है। इसका कॉलोनी के लोगों ने विरोध किया और शिकायत भी की। अब फैसला पक्ष में आया है।