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दशहरे में नमूने, होली पर रिपोर्ट

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गोरखपुर।
बाजार से खाने-पीने की वस्तुएं खरीद रहे हैं तो उसकी गुणवत्ता को लेकर खुद ही सतर्क रहना होगा। खाद्य सुरक्षा विभाग के भरोसे रहे तो जेब तो हल्की होगी ही अस्पताल जाने तक की भी नौबत आ सकती है। दरअसल जांच के लिए भेजे जाने वाले नमूनों की रिपोर्ट लैब से जब तक जांच होकर आती है तब तक संबंधित दुकान से खाद्य पदार्थ का वह स्टाक ही बिक गया होता है जिसके नमूने लिए गए थे। ऐसे में जब तक यह जानकारी हो पाती है कि संबंधित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता ठीक नहीं है या फिर वह मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, लोग उसका सेवन कर चुके होते हैं। विभाग द्वारा भेजे गए ज्यादातर जांच नमूनों की रिपोर्ट आने में तीन से चार महीने का समय लग जाता है जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग के ही मुताबिक 14 दिन या फिर अधिकतम महीने भर में रिपोर्ट आ जानी चाहिए।

छह लैब पर 75 जिलों का भार
उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग के कुल छह लैब हैं, जो गोरखपुर के अलावा आगरा, झांसी, मेरठ, लखनऊ, वाराणसी में स्थित हैं। इन्हीं लैब पर प्रदेश के सभी 75 जिलों से भेजे गए नमूनों की जांच की जिम्मेदारी है। गोरखपुर से लिए गए नमूने जांच के लिए आगरा लैब भेजे जाते हैं। कुछ सर्विलांस नमूने झांसी के लैब में भी भेजे जाते हैं। साल भर में प्रत्येक जिले से खाद्य पदार्थों के औसतन करीब आठ सौ से एक हजार नमूने जांच के लिए भेजे जाते हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक लैब में संसाधन की कमी के साथ ही जांच करने वालों की भी संख्या काफी कम होने की वजह से समय से जांच रिपोर्ट नहीं आ पाती।
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दर्जन भर दुकानों से लिए गए नमूने
गोरखपुर। त्यौहारों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने तीन दिन में दर्जन भर दुकानों से व्रत में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के नमूने लिए, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है। 25 सितंबर को चले अभियान में टीम ने मोहद्दीपुर स्थित तीन दुकानों से मूंगफ ली का दाना, किशमिश , शिव प्रोविजन स्टोर से कुट्टू का आटा, विजय चौक की एक दुकान से तिन्नी का चावल तथा बेतियाहाता स्थित एक दुकान से किशमिश का नमूना लिया। इसी तरह टीम ने 22 और 23 सितंबर को भी पादरी बाजार, झुंगिया बाजार, भटहट और बांसगांव स्थित करीब छह दुकानों से किशमिश, बकले की दाल, मूंगफ ली दाना, किशमिश, छुहारा आदि का नमूना लिया।
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लैब में जांचकर्ताओं की संख्या कम होने से कभी-कभी जांच रिपोर्ट आने में थोड़ी देर हो जाती है। विभाग सतर्क है। जहां ज्यादा गड़बड़ी मिलती है, वहां संबंधित खाद्य पदार्थ को सीज करने की भी कार्रवाई की जाती है। :
- पीएन सिंह, सहायक खाद्य आयुक्त
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