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जापान की मशीनें बनाएंगी खाद

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गोरखपुर।
गोरखपुर में बनने वाले खाद कारखाने की मशीनों सेप्रदूषण न हो इसे लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार संजीदा है। गैस से संचालित होने वाले इस कारखाने में अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, जो जापान, जर्मनी या फ्रांस से खरीदने की तैयारी है। जनवरी 2018 से मशीनों के लगाए जाने का काम भी शुरू हो जाने की उम्मीद है। करीब छह सौ एकड़ में बनने वाले खाद कारखाने का काम दिसंबर 2020 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है।
एनटीपीसी, कोल इंडिया लिमिटेड और आईओसीएल के ज्वाइंट वेंचर हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने राम कुमार गुप्ता को गोरखपुर क ारखाने का जीएम तैनात किया है। पदभार संभालने के साथ ही उन्होंने यहां काम की निगरानी भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का भी यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। एचयूआरएल भी इसे तय समय पर पूरा करने के लिए संकल्पित है। पखवारे भर के भीतर ही साइट लेवलिंग (जमीन बराबर) करने का काम शुरू हो जाएगा। इस काम के एवार्ड की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। दिसंबर 2017 तक जमीन को समतल करने के साथ ही थोड़ी मिट्टी की भी भराई कराई जाएगी। जिसके बाद मशीनें लगाए जाने का काम शुरू हो जाएगा।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दी एनओसी
जीएम रामकुमार गुप्ता ने बताया कि कारखाने में लगने वाली मशीनों से किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं होगा। यह कारखाना पूरी तरह से गैस संचालित होगा । कारखाना निर्माण के लिए प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी एनओसी दे दी हैं।

3850 मीट्रिक टन रोजाना होगी क्षमता
खाद कारखाने की मशीनों की उत्पादन क्षमता भी अधिक होगी। कारखाने में लगाई जाने वाली मशीनें रोजाना 2200 मीट्रिक टन अमोनिया और 3850 मीट्रिक टन यूरिया तैयार करेगी। यहां बनने वाली अमोनिया और यूरिया गोरखपुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों में सप्लाई की जाएगी।
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दो महीने में हट जाएगा स्क्रैप
खाद कारखाने में सभी नई मशीनें लगेंगी। कारखाने की पुरानी मशीनों समेत दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को स्क्रैप के तौर पर बेचा जा रहा है। मुंबई की अंकित इंटरनेशनल कंपनी को स्क्रैप हटाने का काम मिला है। कंपनी पिछले करीब तीन महीने से स्क्रैप हटाने का काम कर रही है। दिसंबर तक पूरा स्क्रैप हट जाने की उम्मीद है। हालांकि नए कारखाने के लिए एचयूआरएल ने एफसीआई से 600 एकड़ ही जमीन ली हैं, जिसपर स्क्रैप नहीं है। ऐसे में कारखाने के निर्माण में स्क्रैप हटाने का काम बाधा नहीं बनेगा।
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