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पढ़ाई की बजाय छत पर खेल रहे बच्चे

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कुशीनगर। अध्यापकों की लापरवाही के चलते कुछ परिषदीय स्कूलों की स्थिति बेहद खराब हो चली है। स्कूलों में नामांकन व उपस्थिति का अंतर तो जगजाहिर है ही, बच्चे खेल मैदान की बजाय छत पर चढ़कर खेल रहे हैं। वह भी तब, जबकि अध्यापक विद्यालय में ही मौजूद हैं।
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कसया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय दिलीपनगर में कुल 121 बच्चों का नामांकन है। छात्र संख्या के अनुसार यहां प्रधानाध्यापक समेत चार का स्टाफ भी है, लेकिन शुक्रवार को यहां केवल 56 बच्चे ही मौजूद थे। एक अध्यापिका सीमा सिंह भी स्कूल नहीं आई थीं। बच्चे पढ़ाई करने या सामने के मैदान में खेलने की बजाय स्कूल भवन की छत पर चढ़कर खेल रहे थे। आश्चर्यजनक यह था कि अध्यापकों ने भी इन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। इस बात की भी चिंता नहीं थी कि अगर कोई बच्चा गिर जाए या कोई अन्य हादसा हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। ऊपर से यह कहना कि बच्चे बड़े शरारती हो गए हैं और मना करने पर मानते ही नहीं।
इस ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अलावल पट्टी में भी बच्चे खेलकूद में मगन थे। प्रधानाध्यापिका पूजा वर्मा समेत तीन का स्टाफ है, लेकिन एक अध्यापिका सीमा यादव स्कूल में नहीं थीं। उपस्थिति व नामांकन का अंतर कहीं दिख न जाए, इस डर से हेडमास्टर ने तर्क रखा कि वे बच्चों की संख्या सिर्फ अपने विभागीय अफसरों को ही बताती हैं। जबकि बीईओ धीरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि छात्रा नामांकन संख्या किसी को भी बताया जा सकता है। अगर स्कूल की हेडमास्टर इसकी जानकारी नहीं देंगी तो एनपीआरसी व बीआरसी से भी इसका विवरण मिल सकता है। बीईओ ने कहा कि जल्दी ही अध्यापकों की बैठक बुलाकर उन्हें निर्देशित किया जाएगा कि छात्र नामांकन संख्या बताने में हीलाहवाली न की जाए, साथ ही बच्चों की सुरक्षा का भी ख्याल रखा जाए। जिस विद्यालय पर बिल्डिंग पर चढ़कर बच्चों के खेलने की बात सामने आ रही है, उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा।
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