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शहीदों की निशानी पर आज लगेगा मेला

Mon, 04 Feb 2019 12:29 AM IST
ajay Kumar अमर उजाला/गाोरख्ापुर
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गोरखपुर। स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देने वाले चौरीचौरा कांड के शहीदों की निशानी पर सोमवार को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का तांता लगेगा। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हर साल चार फरवरी को शहीद स्मारक पर शहीदों को नमन किया जाता है।
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चार फरवरी 1922 को विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार व नशीले पदार्थों का विरोध करते हुए सत्याग्रहियों का जत्था गुजर रहा था। चौरीचौरा थाने के सामने पुलिस ने सत्याग्रहियों पर घोड़े दौड़ा दिए। सत्याग्रहियों की घेरकर पिटाई की गई। उससे उग्र हुए लोगों ने थाने को घेर लिया। पुलिस ने गोलियां चलानी शुरू कर दी थीं। कई लोगों को गोलियां लगने के बाद भीड़ का गुस्सा और बढ़ गया। गोलियां खत्म होने के बाद पुलिसकर्मी थाने में छिप गए। भीड़ ने थाने को घेरकर आग लगा दी थी। इस घटना में तत्कालीन थानेदार गुप्तेश्वर सिंह सहित 23 पुलिसकर्मी मारे गए। 11 सत्याग्रहियों की मौके पर मौत हो गई थी। 50 से ज्यादा सत्याग्रही घायल हुए थे। इस कांड में एक सिपाही मोहम्मद सिद्दीकी ही बचकर भाग पाया और झंगहा पहुंचकर गोरखपुर के तत्कालीन कलेक्टर को घटना की सूचना दी थी।

इस घटना से आहत होकर महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय ले लिया। घटना के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने दमनकारी नीति अपनाई। चौरीचौरा के आसपास के गांवों में पुलिस ने बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की। लोगों के घर फूंक दिए गए। फसलें जला दी गईं। काफी संख्या में लोगों को गिरफ्तार कर यातनाएं दी गईं। 228 लोगों को ट्रायल में लाया गया। आठ महीने तक चले ट्रायल के बाद 172 लोगाें को फांसी की सजा सुनाई गई थी। कुछ लोगों की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई थी। कई संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया। पंडित मदन मोहन मालवीय ने आरोपी बनाए गए लोगों के पक्ष में हाईकोर्ट मेें जोरदार पैरवी की। उसके बाद कई लोग रिहा हो गए और कई की सजा कम हो गई। हालांकि हाईकोर्ट ने 19 लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी। आजादी के बाद से चौरीचौरा में शहीदों की स्मृति में स्मारक के निर्माण की मांग उठ रही थी। बाद में रेलवे स्टेशन के सामने भव्य स्मारक का निर्माण कराया गया।

मारे गए पुलिसकमियों को भी दी जाती है श्रद्धांजलि

अंग्रेजी हुकूमत के समय देश का यह पहला यह कांड था, जिसमें पुलिस की गोली खाकर जान गंवाने वाले आजादी के दीवानों के अलावा गुस्से का शिकार बने पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी जाती है। पुलिसवालों को अपनी ड्यूटी के दौरान जान गंवाने के लिए याद किया जाता है। पुलिसकर्मियों की याद में थाना परिसर में ही स्मारक का निर्माण कराया गया है। चार फरवरी को इस स्मारक पर पुलिस की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की जाती 

थाने में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मी

तत्कालीन थानेदार गुप्तेश्वर सिंह, उप निरीक्षक बल पृथ्वी पाल सिंह, हेड कांस्टेबल वशीर खां, कपिलदेव सिंह, लखई सिंह, रघुवीर सिंह, विषेशर राम यादव, मोहम्मद अली, हसन खां, गदाबख्श खां, जमा खां, मगरू चौबे, रामबली पांडेय, कपिलदेव, इंद्रासन सिंह, रामलखन सिंह, मर्दाना खां, जगदेव सिंह, जगई सिंह और उस दिन वेतन लेने थाने पर आए चौकीदार बजीर, घिसई, जथई व कतवारू राम की मौत हुई थी।
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इन्हें दी गई थी फांसी

अब्दुल्ला, भगवान, विक्त्रस्म, दुदही, काली चरण, लाल मोहम्मद, लौटी, मादेव, मेघू अली, नजर अली, रघुवीर, रामलगन, रामरूप, रूदाली, सहदेव, संपत पुत्र मोहन, संपत, श्यामसुंदर और सीताराम।
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