दिवाली पर शहर के विभिन्न जगहों पर स्थापित मां लक्ष्मी की प्रतिमा का विसर्जन शनिवार को भी किया गया। प्रतिमाओं के साथ श्रद्धालु जयघोष करते विसर्जन स्थल पर पहुंचे।
धनतेरस के दिन कई जगहों पर पर देवी लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। प्रतिमाओं की पूजा के बाद दीपावली से तीसरे दिन उन्हें नदियों में विसर्जित किया जाता है। दिवाली के बाद शुक्रवार को यम द्वितीया के दिन से विधिवत पूजन, हवन के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हुआ, जो शनिवार को भी देर जारी रहा। प्रतिमाओं के गुजरने वाले रास्तों पर दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।
अबीर-गुलाल उड़ाते निकले युवा
दीवाली पर विभिन्न पंडालों में स्थापित मां लक्ष्मी की प्रतिमाओं का शनिवार को दूसरे दिन भी डोमिनगढ़ और राजघाट स्थित कृत्रिम तालाब में विसर्जन किया गया। लक्ष्मी पूजा समितियों के सदस्य बाजे-गाजे के साथ अबीर गुलाल उड़ाते हुए प्रतिमाओं को विसर्जित किया। छोटेकाजी पुर जगन्नाथपुर, दाउदपुर, रूस्तमपुर समेत कई और इलाकों में स्थापित लक्ष्मी की प्रतिमाएं बेहद आकर्षक रहीं।
समाजसेवियों ने किया भंडारे का इंतजाम
शनिवार को मूर्ति विसर्जन के पहले शुक्रवार को शहर में कई संस्थाओं और समिति की तरफ से भंडारे का आयोजन किया गया। जगन्नाथपुर में नवयुवक समिति के शालीन, विभोर, सचिन, आदित्य, गोलू, निहाल समेत अन्य युवाओं ने भंडारे का आयोजन किया। शाम को हवन पूजन के बाद देर रात तक भंडारा चला। वहीं रुस्तमपुर में लक्ष्मी पूजा समिति के राजेश, राहुल, गोलू आदि सदस्यों ने शनिवार को मूर्ति विसर्जन के पहले भंडारा आयोजित किया।
पथ प्रकाश व सुरक्षा व्यवस्था रही चाक चौबंद
विसर्जन वाले दिन पूरे शहर में जिला प्रशासन की तरफ से पथ प्रकाश के लिए मुकम्मल इंतजाम किए गए थे। रास्तों पर चूना डालकर सफाई भी की गई थी। विजर्सन के दौरान सड़क पर पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई थी। बनाए गए तालाबों में एकत्र मिट्टी और पुआल को साफ कराया गया। रास्ता दुरुस्त कराने के साथ ही लाइट की भी व्यवस्था की गई।