गोरखपुर विश्वविद्यालय में नाटक का मंचन किया गया।
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह सप्ताह के तहत बुधवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रसमंजरी’ का आयोजन हुआ। इसमें बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ थीम पर नाटक का मंचन किया गया। बुंदेलखंड की लोक नाट्य शैली ‘स्वांग’ पर आधारित ‘बोझ नहीं भविष्य हूं’ नाटक के जरिये कलाकारों ने बड़ा सामाजिक संदेश दिया। बताया कि बेटे और बेटी समान हैं। दोनों को एक नजरिए से देखना चाहिए। डॉ. हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन वाले नाटक ने पिता की आंखें तब खोलीं, जब बेटों ने उनसे दुर्व्यवहार शुरू कर दिया। वहीं, बेटियों से हमेशा स्नेह मिला।
दीक्षा भवन में आयोजित समारोह का उद्घाटन कुलपति प्रो. वीके सिंह, उनकी पत्नी गीता सिंह, मेयर सीताराम जायसवाल और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने किया। इसके बाद डॉ. कुमकुम धर और उनकी टीम की कत्थक शैली में ‘राम वियोग’ नृत्य नाटिका का प्रदर्शन किया। विदेश से आए रविशंकर मिश्र और फैनी मार्के उर्फ मीरा, प्रीतम, गौरव, मितेश मिश्र ने गीत-संगीत की बेहतरीन प्रस्तुति दी। गोरखपुर विश्वविद्यालय में ललित कला एवं संगीता विभाग के छात्र-छात्राओं ने लोकगीत, भजन की प्रस्तुति देकर वाहवाही बटोरी। अंत में कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. उमा श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर प्रति कुलपति प्रो. एसके दीक्षित, कुल सचिव सतीश शर्मा, वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे, प्रो. ऊषा सिंह, प्रो. दिव्यारानी सिंह, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. शुभंकर डे, डॉ. प्रदीप साहनी, लेखाधिकारी पीएन सिंह, डॉ. गौरी शंकर चौहान, प्रदीप राजौरिया और श्रद्धा शुक्ला मौजूद रहीं।