गोरखपुर। गोरक्ष पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शुक्रवार को देरशाम गोरखनाथ मंदिर से भव्य विजय जुलूस निकला। कड़ी सुरक्षा के बीच जुलूस के बीच चलता भगवा रंग का रथ शहर के अलग-अलग हिस्सों से होकर मानसरोवर मंदिर पहुंचा। वहां मुख्यमंत्री ने भगवान शिव की पूजा की, फिर रामलीला मैदान पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें श्रीराम के उस आदर्श को अंगीकार करना होगा जो हरिजन , गिरीजन को गले लगाने का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने रामलीला के श्रीराम का राजतिलक किया। इसके बाद लक्ष्मण, सीता और हनुमान की अभिषेक किया। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रामलीला का मंचन भी हुआ। श्रीराम और रावण के बीच संवाद हुआ, फिर अधर्म के प्रतीक रावण का बध किया गया। श्रीराम के कमान से निकला तीर जैसे ही रावण की नाभि में जाकर लगा। श्रीराम के जयकारे लगने लगे।
शनिवार को जला रावण का पुतला
रामलीला मंचन के दौरान शुक्रवार की देरशाम श्रीराम ने रावण का वध कर दिया लेकिन भारी भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए रावण के पुतले का दहन नहीं किया गया। रावण का पुतला शनिवार जलाया गया।
काशी का डमरू दल आकर्षण का केंद्र
विजय जुलूस के साथ चलने वाला काशी का डमरू दल आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर के कार्यालय सचिव द्वारिका तिवारी के मुताबिक सांई बाबा डमरू संस्थान के 11 सदस्यों को कार्यक्रम में बुलाया था। जब जुलूस निकला तो भगवान शिव और श्रीराम के जयकारे लगे। डमरू की थाप पर ऐसा भक्ति भाव जागा कि श्रद्धालु झूम उठे।
श्रीनाथ जी का विशेष अनुष्ठान
गोरक्ष पीठाधीश्वर नवरात्र के बाद जब आवास से बाहर आए तो सुबह नौ बजे योगियों और संतों की टोली के साथ श्रीनाथ जी के मंदिर गए। मंत्रोच्चार के बीच विशेष अनुष्ठान किया। गोशाला जाकर गो सेवा की। मंदिर के आंगन में तुलसी, कुआं, कोठार के साथ जहां भक्तों के लिए भोजन बनता है, वहां जाकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद नवरात्र के कलश की पूजा करके आगे बढ़े।
परंपरागत रूप से हुआ तिलकोत्सव
गोरखनाथ मंदिर में विजयदशमी के दिन तिलकोत्सव का कार्यक्रम परंपरागत तरीके संपन्न हुआ। शुक्रवार को दोपहर एक बजे तिलक हाल में दही, अक्षत, चंदन और जई रखा गया। कतारबद्ध होकर भक्त सीएम के पास गए और माथे पर तिलक लगाकर आशीर्वाद लिया। यह सिलसिला करीब तीन घंटे तक चला।
सुरक्षा में मंदिर के सैनिक
गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाले विजय जुलूस की सुरक्षा में मंदिर के सैनिक भी शामिल रहे। सिर पर केशरिया साफा बांधे, हाथ में भाला, फरसा व तलवार लेकर सैनिक आगे-आगे चल रहे थे। पुलिस, प्रशासन की मौजूदगी में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त थी।