सिद्धार्थनगर। गरीबों के हिस्से का खाद्यान्न अब कोटेदार नहीं डकार पाएंगे। उनके स्टॉक की मॉनिटरिंग के लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है। हर माह कोटेदार को क्लोजिंग बैलेंस दर्शाना होगा। दुकान पर जितना भी राशन वितरण से बचा रहेगा, नए माह के लिए आवंटित खाद्यान्न से उतनी मात्रा कम कर दी जाएगी। इस पूरे सिस्टम को सप्लाई चेन का नाम दिया गया है। मार्च से इसे अमल में लाया जाएगा।
सरकारी कोटे की दुकानों पर बिचौलियों की सक्रियता पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने सप्लाई चेन तैयार की है। इसमें गोदाम से निकले खाद्यान्न को कार्डधारक तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। पहले चरण में गोदाम से उठने वाले खाद्यान्न को कोटे की दुकान तक पहुंचाने वाले वाहनों को जीपीएस के दायरे में लाया गया था। राशन कार्ड पर दर्ज प्रत्येक यूनिट के आधार नंबर को कार्ड से लिंक करने की प्रक्रिया चल रही है। अब कोटेदार के पास उपलब्ध खाद्यान्न का पूरा विवरण भी ऑनलाइन किया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत हर माह प्रत्येक कोटेदार के स्टॉक का ओपनिंग और क्लोजिंग बैलेंस विभागीय पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। अगर कोटेदार के पास खाद्यान्न की मात्रा बचती है तो वह उसे इसका विवरण पेश करना होगा। इसके आधार पर ही उतनी मात्रा में खाद्यान्न नए माह के आवंटन से कम कर दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के चलते वितरण में पारदर्शिता आएगी। गरीबों को खाद्यान्न न बांटकर बाजार में बिक्री करने वाले कोटेदारों पर शिकंजा कसेगा।
जिला पूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने बताया कि खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता के लिए सप्लाई चेन तैयार की जा रही है। अब कोटेदारों को हर माह दुकान में अवशेष स्टॉक को दर्शाना होगा। आपूर्ति निरीक्षक के माध्यम से यह डाटा पोर्टल पर फीड किया जाएगा। नए माह के आवंटन से इतनी मात्रा स्वत: कम हो जाएगा। मार्च से इसे शुरू किया जाएगा। जून तक अंगूठा लगाकर वितरण को भी लागू करने की तैयारी है।
राशन कार्ड से लिंक होगा हर सदस्य का आधार
वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए शासन ने राशन कार्ड पर दर्ज सभी सदस्यों के आधार नंबर को कार्ड से लिंक करने का निर्देश दे रखा है। इस पर काम भी शुरू है। कुल 4.35 लाख कार्डधारकों के सापेक्ष 41 फीसदी का आधार लिंक भी हो चुका है। शत-प्रतिशत आधार लिंक होने के बाद कार्डधारकों को अंगूठा लगाने के बाद ही राशन मिल पाएगा। यानि जितने कार्डधारकों ने अंगूठा लगाया, उन्होंने राशन प्राप्त कर लिया। इससे बचे हुए खाद्यान्न की जानकारी भी हो जाएगी।
ऐसे काम करेगा सप्लाई चेन
प्रत्येक कोटेदार को आवंटित खाद्यान्न की मात्रा अंत्योदय व पात्र गृहस्थी परिवारों की संख्या के आधार पर पहले से तय है। लिहाजा गोदाम से उतनी मात्रा में खाद्यान्न विभागीय वाहन से कोटे की दुकान तक भेजा जाएगा। दुकान से कार्डधारकों में खाद्यान्न का वितरण बायोमेट्रिक सिस्टम पर अंगूठा लगाने के बाद होगा। जितने कार्डधारक अंगूठा लगाएंगे, कोटेदार को उन्हें खाद्यान्न देना ही होगा। वितरण से बचे खाद्यान्न के बराबर राशन की मात्रा नए माह के आवंटन में गोदाम से ही कटौती कर ली जाएगी।
खाद्यान्न बचाकर मालामाल होते रहे कोटेदार
वितरण से बचा खाद्यान्न ही कोटेदारों की कमाई का मुख्य जरिया था। आमतौर पर दुकानों से अधिकतम 85 फीसदी तक राशन ही बंट पाता है। अन्य कार्डधारक बाहर रहने या किसी अन्य कारण से खाद्यान्न नहीं ले पाते। बचे हुए इस खाद्यान्न को ही रजिस्टर पर फर्जी इंट्रियां कर हड़प लिया जाता था। ऑनलाइन सिस्टम से इस पर रोक लगेगी।