गोरखपुर।
ब्लड प्रेशर समेत मनोरोगियों को दी जाने वाली नींद की दवा का नमूना शुक्रवार को आई जांच रिपोर्ट में फेल निकला। गंभीर मरीजों को दी जाने वाली यह दवा अधोमानक मिली है। यह पहली बार नहीं जब बाजार में बिक रही दवाओं में खामी पकड़ी गई है। इससे पहले भी कई दवाएं जांच में अधोमानक और मिथ्या छाप निकली हैं। तमाम कंपनियों ने इस तरह की ‘बेअसर’ दवाएं बाजार में उतार रखी हैं। ये न सिर्फ मरीज का मर्ज बढ़ा रही हैं बल्कि उसकी जेब पर भी बट्टा लगा रही हैं।
सेहत के लिए खतरनाक
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता बताते हैं कि अधोमानक दवाएं सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। उनका नुकसान किस तरह का होगा, यह उस दवा की प्रकृति और मिलावट पर निर्भर करेगा। अपनी प्रैक्टिस के दौरान गांव से आने वाले कई मरीजों में अधोमानक दवाओं का साइड इफेक्ट देखा है। एक बार उल्टी-दस्त के एक मरीज का मर्ज ऐसी ही अधोमानक दवा से बिगड़ते देखा था। तब बीमारी से न सिर्फ उसकी हालत खराब हो गई थी बल्कि उसके मुंह में छाले भी पड़ गए थे। ब्लड प्रेशर की दवा अगर अधोमानक होगी तो मरीज को इसका लाभ नहीं होगा उल्टे ब्लड प्रेशर बेकाबू होने से मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है। कैंसर से लेकर अन्य बीमारियों के मरीजों की जीवनरक्षक दवाएं अगर अधोमानक होंगी तो मरीज को इनका लाभ मिलने की जगह नुकसान ही होगा। कई बार दवाओं में मिलावट से गंभीर दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं।
चार माह में लिए गए 40 सैंपल, आधे फेल
ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार बताते हैं कि हर माह औसतन 10 सैंपल लिए जा रहे हैं। चार महीने के दौरान 40 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इनमें से कुछ की ही रिपोर्ट आई है। उधर, औषधि नियंत्रण विभाग से भेजे गए दवाओं के आधे सैंपल फेल निकले। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि 30 में से 15 सैंपल ठीक पाए गए, लेकिन 15 नमूने अधोमानक और मिस ब्रांडेड (मिथ्या छाप) पाए गए।
गांवों में 20 से 30 प्रतिशत दवाएं ‘बेकार’
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता ने बताया कि समय-समय पर आने वाली ड्रग कंट्रोलर की रिपोर्ट पढ़कर पता चला है कि गांवों में स्थितियां काफी खराब हैं। देहात क्षेत्रों में करीब 20 से 30 फीसदी अधोमानक दवाएं बिकती हैं। हालांकि, शहर में स्थिति थोड़ी बेहतर है। इसका बड़ा कारण गांवों के मुकाबले शहरों में लोगों का ज्यादा पढ़ा-लिखा और जागरूक होना है।
अगस्त में फेल निकले थे कई नमूने
पानीपत की कंपनी में बनी एल्प्राजोलाम 0.5 मिलीग्राम टेबलेट का सैंपल अगस्त में फेल निकला था। मैक्सवेल फार्मास्यूटिकल्स इस दवा को एलमाक्स नाम से बेचती है। इसके साथ ही गोरेपन की क्रीम मेलाज और मेमोपी जांच में मिस ब्रांडेड निकली थीं। एंटीएलर्जिक टेबलेट प्रिवेंट एच भी मिस ब्रांडेड मिला था।
हाल में आई रिपोर्ट में भी कई दवाएं गड़बड़
हाल ही में औषधि विभाग को मिली जांच रिपोर्ट में कई दवाएं अधोमानक निकली थीं। कुछ समय पहले भालोटिया मार्केट से आंख के मलहम क्लोरोसोल का नमूना भी जांच में फेल हो गया था। एंटीबायोटिक दवा ओफ्लान का सैंपल भी फेल मिला था। साथ ही सात दवाएं मिस ब्रांडेड मिली थीं।
एमएक्स 0.5 भी अधोमानक मिली
औषधि विभाग को शुक्रवार को मिली रिपोर्ट में हाल ही में जांच के लिए भेजे गए दो सैंपल फेल मिले हैं। एल्प्राजोलाम फार्मूले वाली दोनों दवा में साल्ट 86 प्रतिशत ही निकला। इस पर औषधि विभाग ने हरिद्वार की इस्टर्न फार्मा, गांधीनगर गुजरात की कंपनी टटसन फार्मा को नोटिस भेजा है। ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने बताया कि जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सावधानी ही बचाव का बेहतर उपाय
दवाओं के गड़बड़झाले से बचने का सबसे अच्छा तरीका जागरूकता है। आईएमए अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता सुझाव देते हैं कि लोग विश्वसनीय दुकानों से दवा खरीदें। खरीदते वक्त बिल जरूर लें। संदेह हो तो सीएमओ समेत खाद्य एवं औषधि विभाग में इसकी कंप्लेंट करें। कई बार दवा के नाम की एक स्पेलिंग बदलकर दूसरी कंपनियाें की अधोमानक दवा दुकानदार लोगों को थमा देते हैं।