गोरखपुर।
नवरात्र के चौथे दिन रविवार को मां कूष्मांडा की उपासना कर देवी भक्तों ने मंगलकामना की। मंदिरों समेत दुर्गा पूजा पंडालों पर श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाया। ज्यादातर व्रतियों ने सुबह घर पर दुर्गा सप्तसती का पाठ भी किया।
पंडालों में सुबह ब्रह्मांड की रचना करने वाली कूष्मांडा देवी का आह्वान किया गया। मान्यता है कि देवी ने कूष्मांडा स्वरूप में ही सृष्टि का विस्तार किया। शाकुंभरी रूप धरकर देवी ने शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार भी किया। मां के कूष्मांडा स्वरूप की धूप-दीप नैवेद्य आदि से विधिवत पूजा अर्चना की गई। पूरे दिन मां के दर्शन-पूजन के लिए मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों पर लोगों के पहुंचने का क्रम चलता रहा।
पंडालों की आभा देखते ही बनी
शाम को रंग-बिरंगी झालरों के बीच आकर्षक ढंग से सजाए देवी पंडालों की आभा देखते ही बनी। छुट्टी का दिन होने के चलते लोग बच्चों को लेकर भी पंडालों की सजावट देखने पहुंचे। गोलघर पंडाल, मोहद्दीपुर दुर्गा पूजा पंडाल, घासीकटरा आदि इलाकों में रात के समय पंडालों की शोभा देखते ही बनी।