गोरखपुर।
सीएम के शहर में ठेले पर हो रही शवों की ढुलाई बंद नहीं हो पाई है। ऐसा तब है जब सीएम के जिले के अफसरों की संवेदनहीनता की बदरंग तस्वीर का संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग डीएम को जांच करके चार हफ्तों में रिपोर्ट देने के लिए कह चुका है। डीएम जांच कर रहे हैं लेकिन जिम्मेदार अफसरों पर उनकी कोई हनक नहीं दिख रही। शुक्रवार को भी मामले में अफसरों का अमानवीय चेहरा सामने आया। एक ठेले पर दो लाशें ढोई गईं। इसके बावजूद अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने में लगे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी तो बार-बार ठेले से लाश ढोने की जिम्मेदारी पुलिस पर डाल रहे हैं।
जिला अस्पताल की मोर्च्यूरी से ठेले पर शव ढोकर मेडिकल कॉलेज ले जाने की खबर को ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से सात जून को प्रकाशित किया था। इस खबर का राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया और डीएम से रिपोर्ट तलब की। इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है। ठेले से लाश ढोने का सिलसिला जारी है। इसके बावजूद मानवता को शर्मसार करने वाले मामले की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर ठेली जा रही है। हालांकि, डीएम ने मामले में सीएमओ से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही थी। शुक्रवार को जब उनसे इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने इसे सीधे तौर पर पुलिस पर थोप दिया। कहा कि पोस्टमार्टम के लिए आने वाले शव को लाने ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है।
जिधर से गुजरा ठेला, फैलती गई दुर्गंध
जिला अस्पताल से 12 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज के लिए ठेले पर शव ले जाया गया। इस दौरान ठेला जहां से गुजरा वहां शवों से उठती सड़ांध लोगों का असहज करती रही। शवों पर भिनभिनाती मक्खियों को देखकर बगल से गुजर रहे लोगों का मिजाज खराब हो गया।
ऑटो की फर्श से खींचा फिर बोरे की तरह फेंका शव
मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम हाउस पर शवों की बेकद्री के कई दृश्य दिखे। इसमें ऑटो की फर्श से बोरे की तरह शव खींचकर फेंकने का दृश्य था तो वहीं दो शवों के बगल में एक स्वीपर के पेशाब करने की करतूत भी दिखी। इस बीच एक परिवार वार्ड से शव स्ट्रेचर पर लेकर पोस्टमार्टम हाउस भी पहुंचा।