बड़हलगंज/कौड़ीराम (गोरखपुर)। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में दंतेश्वर मौर्या के भी शहीद होने की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव कौड़ीराम के माहोपार में लोग गम में डूब गए। हालांकि फर्ज निभाते हुए गांव के लाल के शहीद होने से लोगों में गर्व भी है। दंतेश्वर के घर ढांढस बंधाने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे। दंतेश्वर की पत्नी मीनाक्षी कुशवाहा प्राथमिक विद्यालय बड़हलगंज द्वितीय में सहायक अध्यापक हैं। वह बड़हलगंज क्षेत्र के सिधुआपार गांव में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहती हैं।
दंतेश्वर मौर्य वर्ष 2006-07 में छत्तीसगढ़ पुलिस में भर्ती हुए थे। उन्हें कमांडो का भी प्रशिक्षण मिला था। इधर वह भाजपा विधायक भीमा मंडावी की सुरक्षा में तैनात थे। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा क्षेत्र के श्यामगिरी के पास मंगलवार को नक्सलियों ने आईईडी विस्फोट से वाहन को उड़ा दिया। वाहन को दंतेश्वर ही चला रहे थे। विधायक समेत सुरक्षा में तैनात पांच जवान शहीद हो गए, जिनमें दंतेश्वर भी शामिल थे। इसकी सूचना मंगलवार की रात पत्नी को मिली। उसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। बुधवार की सुबह सिधुआपार स्थित उनके आवास पर भीड़ जुट गई। मां कलावती देवी और पत्नी मीनाक्षी बेसुध हो गईं। दंतेश्वर एक माह पूर्व छुट्टी पर घर आए थे।
भांजी की शादी में 12 अप्रैल को आना था घर
दंतेश्वर की भांजी की शादी 18 अप्रैल को तय हैं। इसी शादी में शामिल होने के लिए वह 12 अप्रैल को घर आने वाले थे। दंतेश्वर की मां कलावती देवी शादी की तैयारी में शामिल होने के लिए अपनी बेटी सविता के घर महराजगंज जिले हल्दी गांव गई हुई थीं। घटना की जानकारी होने पर वह सिधुआपार स्थित आवास पर पहुंच गई थीं। उनका भी रो-रोकर बुरा हाल है।
भाई भी छत्तीसगढ़ पुलिस में तैनात
दंतेश्वर के बड़े भाई योगेंद्र मौर्य भी छत्तीसगढ़ पुलिस में तैनात हैं। उनकी तैनाती भी छत्तीसगढ़ के सुकोमा में है। दोनों ही भाई एक साथ छुट्टी पर आने वाले थे।
2009 में हुई थी शादी
दंतेश्वर मौर्य की शादी 2009 में मीनाक्षी के साथ हुई थी। आजमगढ़ जनपद के कल्यानपुर के लालचंद कुशवाहा की बेटी मीनाक्षी नौकरी के साथ घर की भी जिम्मेदारियां संभालती हैं। मीनाक्षी का सात वर्षीय इकलौता बेटा आग्रह कक्षा दो में पढ़ता है।
अधिकारी संवेदनहीन, नहीं पहुंचे सांत्वना देने
दंतेश्वर के चाचा रामरतन मौर्य ने बताया कि गांव और परिवार के लोगों में इस बात का भी दुख है कि पुलिस और प्रशासन का कोई अधिकारी उनके घर नहीं आया। लोगों का भी कहना था कि सांत्वना देने आसपास गांवों के अलावा दूर-दराज से भी लोग आए, लेकिन किसी अधिकारियों की संवेदनहीनता काफी खली।