गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के संत और ऋषियों ने आध्यात्मिक क्षेत्र में पूरी दुनिया का नेतृत्व किया। योग को यूएनओ की मान्यता भी संत व ऋषि परंपरा का ही प्रसाद है। गुरू गोरखनाथ का राजवंश से लेकर झोपड़ी में रहने वालों पर समान प्रभाव था। गुरू श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ देश की आध्यात्मिक परंपरा को नया आयाम देगी। यहां शोधार्थी देश और दुनिया में नाथपंथ से जुड़े साहित्य और आध्यात्म पर शोध कर सकेंगे और ज्यादा से ज्यादा जानकारियां सामने आएंगी।
मुख्यमंत्री ने इसके पूर्व शुक्रवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ का शिलान्यास, शोधपीठ की वेबसाइट और डॉ. प्रदीप राव की पुस्तक नाथपंथ का लोकार्पण किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के योग संगम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा रही है। हमारेे सामने शैक्षिक गुणवत्ता को बनाए रखने की चुनौती है। गुरू गोरखनाथ कहते थे कि हमारे शरीर में ही ये क्षमता है कि हम एक जगह बैठकर संपूर्ण ब्रह्मांड के रहस्य को खुद की चेतना के जरिये महसूस कर सकते हैं। इसी से लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग की विभिन्न मुद्राओं में आसन का महत्व है। आसन से एकाग्रचित होकर धैर्य से आगे बढ़ सकते हैं। विधार्थियों को इसका ख्याल रखना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो वीके सिंह ने नाथपंथ और विश्वविद्यालय की प्रगति की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह तथा आभार ज्ञापन डॉ. केशव सिंह ने किया।
इस अवसर पर सांसद शरद त्रिपाठी, राजसपंर्क अधिकारी अंशुमाली शर्मा, एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. एसएन सिंह, प्रो. योगेंद्र सिंह, प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. अजय शुक्ला, प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
नाथपंथ का विश्व शब्दकोष बनेगा
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नाथपंथ का विभिन्न भाषाओं में साहित्य है। इस शोधपीठ के माध्यम से नाथपंथ का एक विश्व शब्दकोष बनेगा। देश ही नहीं नेपाल, अफगानिस्तान, तिब्बत, बांग्लादेश, पाकिस्तान में नापथपंथ से जुड़े बहुत से स्थान हैं। यहां लोगों में नाथपंथ के प्रति आस्था है। इन पर शोध का एक मंच प्राप्त होगा।
2020 तक सभी विश्वविद्यालय व कॉलेजों की नैक ग्रेडिंग
गोरखपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. धीरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों में आध्यात्मिक विकास जरूरी है। इससे उनमें नई दृष्टि, ऊर्जा और सकारात्मक सोच पैदा होती है। शिक्षक ऐसा माहौल बनाएं कि विद्यार्थियों में नए विचार पनपें। मस्तिष्क के साथ ही हाथ व ह्दय का ख्याल रखें। विश्वविद्यालयों को ऐसा प्रयास करना चाहिए। प्रो. सिंह ने कहा कि नैक की ग्रेडिंग लेने में हम पीछे हैं। यूपी में 74 में से 32 विश्वविद्यालय और 6090 में 566 कॉलेजों ने नैक परीक्षण कराया है, जबकि नए प्रोजेक्ट, बजट आदि के लिए नैक की ग्रेडिंग अनिवार्य है। यूजीसी ने वर्ष 2020 तक देश के सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों का नैक परीक्षण कराने का लक्ष्य रखा है। सोशल कनेक्ट बढ़ाने के लिए सभी कॉलेजों को पांच गांव गोद लेने होंगे ताकि शिक्षक और विधार्थी गांव के बारे में ज्यादा जान सकें और उन्हें समाज के मूलधारा से जोड़ने में मददगार बनें।
राकेश ने किया गोरखवाणी का पाठ
गोरखपुर। समारोह में लोकगायक राकेश श्रीवास्तव गोरखवाणी के 30वें पद का पाठ किया। निर्गुण भक्ति में ‘शिव अवतारी गोरख तेरी महिमा अपरमपार...’ सुनाकर गुरू गोरक्षनाथ की महिमा बताई।