गोरखपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से निर्धारित शैक्षिक योग्यता और शोध का मानक पूरा करने वाले यूपी के अनुदानित डिग्री कॉलेजों के कार्यवाहक प्राचार्य को राजकीय डिग्री कॉलेजों के नियमित प्राचार्य के बराबर वेतनमान मिलेगा। इस पर उच्च शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता वाली समिति ने पांच जुलाई 2018 को मुहर भी लगा दी है। गोरखपुर विश्वविद्यालय से 21 अनुदानित डिग्री कॉलेजों की संबद्धता है।
यूपी के ज्यादातर अनुदानित डिग्री कॉलेजों में कार्यवाहक प्राचार्य की तैनाती है। इसमें वरिष्ठता का ख्याल नहीं रखा गया। इसी का हवाला देते हुए डॉ. स्वदेश श्रीवास्तव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका (संख्या 23627) दाखिल की थी। मांग थी कि कार्यवाहक प्राचार्य को नियमित प्राचार्य के बराबर वेतनमान दिया जाए। इस पर हाईकोर्ट की वृहद पीठ ने वर्ष 2014 में फैसला सुनाया। फिर उच्च शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। इस समिति ने शैक्षिक अर्हता, शोध का अध्ययन किया और रिपोर्ट बनाकर दो अगस्त 2018 को गोरखपुर सहित सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी को भेज दी।
इसके मुताबिक प्राचार्य की नियुक्ति में वरिष्ठता का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। यूजीसी के शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता का मानक पूरा करने वाले प्राचार्य को 15600-39100 की जगह 37400-67000 रुपये का वेतनमान दिया जाएगा। एकेडमिक ग्रेड पे (एजीपी) 6000, 7000 और 8000 की जगह प्रतिमाह 10 हजार रुपये कर दिया जाएगा। कार्यवाहक प्राचार्यों को नियमित प्राचार्य के बराबर वेतन और ग्रेड पे का भुगतान निदेशालय के प्रशासनिक आदेश से ही किया जा सकेगा। यह व्यवस्था क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी को सुनिश्चित करानी है।
मानक न पूरा करने वाले प्राचार्यों को झटका
यूजीसी की शैक्षिक योग्यता और शोध का मानक पूरा न करने वाले अनुदानित डिग्री कॉलेजों के प्राचार्य को झटका लगा है। उच्च शिक्षा निदेशक की समिति ने कहा है कि ऐसे प्राचार्य को राजकीय डिग्री कॉलेजों के प्राचार्य के बराबर वेतनमान नहीं दिया जा सकता। समिति का कहना है कि यदि किसी प्राचार्य को 10 हजार रुपये एकेडमिक ग्रेड पे मिलता है तो वह भी गलत है। इसे निरस्त किया जाना चाहिए। ऐसे में मानक पूरा न करने वाले अनुदानित कॉलेजों के कार्यवाहक प्राचार्यों की मुश्किल बढ़नी तय मानी जा रही है।
उच्च शिक्षा निदेशक की समिति की रिपोर्ट मिल गई है। इसका अनुपालन गोरखपुर और बस्ती मंडल में सुनिश्चित कराया जाएगा। वरिष्ठता और शैक्षिक योग्यता के हिसाब से वेतनमान दिलाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
-डॉ. अश्वनी कुमार मिश्र, क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी, गोरखपुर