महोत्सव में शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करती प्रतिभागी।
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गोरखपुर। लोक संस्कृति हमारे व्यवहार और संस्कार से जुड़ा है। इसमें माटी की महक है। लोक कलाएं हमारे जीवन से जुड़ी हैं तो लोक संगीत हमारे जीवन का संगीत है। लोक संगीत हमेशा से लोकप्रिय रहा है। फिल्मों में जब भी कोई लोक संगीत इस्तेमाल हुआ है तो वह सुपर-डुपर हिट साबित हुआ है। ये बातें देश-दुनिया में भोजपुरी संगीत की मिठास फैलाने वाली पद्मभूषण शारदा सिन्हा ने कहीं। वह गोरखपुर महोत्सव में शिरकत करने गोरखपुर आई हैं।
उन्होंने कहा कि फिल्मी संगीत में तमाम गाने फोक से ही लिए गए हैं। पाकीजा का गाना ‘इन्हीं लोगों ने...’ भी लोक संगीत से ही प्रेरित था। भोजपुरी के विद्यापति का एक गाना ‘पिया मोरा बालक...’ सुनाते हुए बताया कि इससे ही प्रेरित होकर मशहूर गाना ‘तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं...’ बनाया गया था।
द्विअर्थी गानों पर फोकस दुखदाई
लोक संगीत बेहद समृद्ध है लेकिन यह बेहद दुखदाई है कि कुछ लोग द्विअर्थी गानों पर फोकस कर रहे हैं। भोजपुरी में रोज कोई न कोई अलबम लाकर कई स्टार हो गए, लेकिन भोजपुरी को समृद्ध करने का मकसद पीछे छूट गया है। हालांकि, बहुत से साधक बेहतर करने की कोशिश में हैं। वह भोजपुरी को मुकाम पर पहुंचाने में लगे हैं।
सस्ती लोकप्रियता के लिए कर रहे इस्तेमाल
लोक संगीत को सस्ती लोकप्रियता के लिए जब इस्तेमाल किया गया है तो इसका सबसे अधिक ह्रास हुआ है। शारदा सिन्हा ने कहा कि खुद को लोकप्रिय गायक बनने की होड़ में लोग भोजपुरी में कोई भी गीत गाकर तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर परोस दे रहे हैं। इससे भोजपुरी या अन्य लोक संगीत को ही नुकसान पहुंच रहा। इससे लोक संगीत की कर्णप्रियता के साथ रियाज की परंपरा समाप्त हो रही।