गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव टाले जाने से हुए बवाल और पुलिसिया तांडव के बाद से हॉस्टलों में शनिवार को सन्नाटा पसरा रहा। खौफ में छात्रों ने शुक्रवार रात हॉस्टल छोड़ दिया और रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के बाहर रात गुजारी। शनिवार सुबह छात्र डर-डर कर हॉस्टल पहुंचे, मगर माहौल में एक दिन पहले की घटना की फैली दहशत के कारण छात्र फिर वहां से चले गए। दहशत का अंदाजा विवेकानंद हॉस्टल और एनसी हॉस्टल के 95 फीसदी से अधिक कमरों पर लटके तालों को देखकर लगाया जा सकता है।
विवेकानंद हॉस्टल के नीतीश, आशीष, मुकेश, अभिषेक, अजय और विजय ने बताया कि बवाल करने के बाद उपद्रवी अक्सर मौके से फरार हो जाते हैं। पुुलिस की बर्बरता का शिकार निर्दोष छात्रों को होना पड़ता है। इसी महीने की 24 तारीख को पीसीएस की परीक्षा है, इसकी तैयारी को लेकर वे महीनों से जुटे हैं। महज 15 दिन पहले बवाल होने से परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो रही है। खौफ के साये में पढ़ाई कर पाना मुश्किल हो गया है। छात्रों ने बताया कि सुबह से ही लगातार घरवालों के फोन आ रहे हैं। सभी डरे और सहमे हुए हैं। हॉस्टल में पुलिस की इतनी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई इससे पहले कभी नहीं हुई थी। एनसी हॉस्टल के आशुतोष ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार रात बेतियाहाता में रहने वाले दोस्त के घर गुजारी। बताया कि जब तक माहौल शांत नहीं हो जाता, गांव जा रहा हूं।
पत्थरबाजों का गुस्सा छात्रों पर उतरा
छात्रों ने बताया कि पत्थरबाज उपद्रवियों का गुस्सा पुलिस ने हॉस्टल के निर्दोष छात्रों को पीट कर निकाला। कमरों की तलाशी ऐसे ली जा रही थी, जैसे किसी अपराधी के कमरों को तलाश रहे हों। पूरा सामान तितर-बितर कर दिया। कॉपी और किताबों को भी नहीं बख्शा। एक घंटे तक जमकर हॉस्टल में तांडव मचाते रहे। किसी ने भी उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की।
पुलिस ने तोड़े सीसीटीवी कैमरे, मिटाएं सबूत
छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने कुछ उत्पातियों के उकसाने पर अचानक विवेकानंद हॉस्टल पर धावा बोल दिया। पुलिसिया तांडव के डर से छात्रों ने गेट पर ताला जड़ा तो शटर तोड़कर पुलिस हॉस्टल में दाखिल हुई। हर कमरे से निर्दोष छात्रों को घसीटकर बाहर निकाला और उन्हें पीटा। कई निर्दोषों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान पुलिस को जब ये जानकारी हुई कि हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरा लगा है तो उसे तोड़ दिया डाला और फुटेज निकालकर चले गए।
नहीं आया कोई जिम्मेदार
छात्रों ने बताया कि पुलिसिया कार्रवाई के 24 घंटे बाद भी यूनिवर्सिटी प्रशासन केे किसी जिम्मेदार ने छात्रों को सुध नहीं ली। कुलपति, रजिस्ट्रार, चीफ प्रॉक्टर को छोड़िए, खुद वार्डेन ने भी मौके पर आने की जहमत नहीं उठाई है। जिम्मेदारों की बेरुखी से छात्रों में यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है।
कक्षाओं में कम रही उपस्थिति
कैंपस में भी छात्र-छात्राओं की उपस्थिति आम दिनों की अपेक्षा बेहद कम रही। हालांकि कक्षाएं अपने समय केे अनुसार चली, मगर विद्यार्थी बेहद ही कम नजर आए। आर्ट्स फैकल्टी, साइंस फैकल्टी, कॉमर्स विभाग, दीक्षा भवन में खचाखच भरी रहने वाली कक्षाओं में शनिवार को महज 30 फीसदी ही उपस्थिति रही।