बैलगाड़ी को खुद ही खींचकर सामान बचाकर बाढ़ ग्रस्त इलाके से बाहर आते ग्रामीण।
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बाढ़ से घिरे लोगों के लिए राहत सामग्री के इंतजाम में ही नहीं, तमाम तरह की प्लानिंग में भी प्रशासन फेल साबित हो रहा है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत सामग्री का वितरण कराने के लिए ज्यादातर ऐसे लेखपालों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिनकी पिछले साल ही तैनाती हुई और अभी तक वे जिले की भौगोलिक स्थिति से ही परिचित नहीं हो सके हैं। नतीजतन उन्हें गांवों का पता ही नहीं। दूसरे हलके के लेखपालों को दूसरे हलके में तैनात कर दिया गया है। वे खुद तो भ्रमित हैं ही बचाव कार्य में लगे एनडीआरएफ और पीएसी के जवानों को भी भ्रमित कर रहे हैं। मानीराम से सटे बाढ़ग्रस्त इलाकों का हाल भी ऐसा ही है।
पीएसी की तीन नावों में राहत सामग्री बंटवाने के लिए प्रशासन ने जो लेखपाल भेजे थे उनमें दो असल पीड़ितों को छोड़ ऐसे गांवों में जवानों को चलने की जिद करने लगे जहां पानी काफी कम लगा था। घुलहवा बंधे पर नाव हाथ से उठाकर किसी तरह पीएसी जवान जब दो नावों के साथ गायघाट पहुंचे तो वहां ग्रामीणों ने राहत सामग्री लेने से यह कहते हुए मना कर दिया कि की वे सुुरक्षित हैं और अभी पूरे गांव में पानी नहीं घुसा है। इसके बाद लेखपाल पर झुझलाते हुए जब पीएसी के जवान लक्ष्मीपुर पहुंचे तो वहां भी सड़क चालू मिली। वहां एक जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि खड़े थे। लेखपाल ने सारा सामान उन्हें थमा दिया। इस पर भी जवान झुंझलाए कि असल पीड़ितों को छोड़ लेखपाल ऐसे गांव तक उन्हें ले आए जहां लोग सुरक्षित हैं।
जलस्तर घटा पर मुसीबत बरकरार
रोहिन के पानी से घिरे इन इलाकों में बंधो के टूटने के बाद यहां का जलस्तर 85.230 मीटर तक पहुंच गया था जो अब करीब तीन फीट कम होकर 83. 830 तक पहुंच गया है। हालांकि अभी भी इन इलाकों के ज्यादातर गांवों में मुसीबत बरकरार है। लोग घरों की छतों पर डेरा डाले हुए हैं। नाव से जो खाने का पैकेट और पानी आदि पहुंच रहा उसी से उनका काम चल रहा है। इनमें भी दूर दराज के गांवों तक जब तक एनडीआरएफ या पीएसी की नाव पहुंच रही है। राहत सामग्री ही खत्म हो जा रही है। जवानों का कहना है कि बीच में ही लोग गिड़गिड़ाने लग रहे है तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्हें भी गहरे पानी में फंसे लोगों तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पाने का मलाल है।
पेट्रोल न मिलने से पांच घंटे रुका रहा राहत कार्य
पेट्रोल खत्म होने की वजह से पीएसी और एनडीआरएफ के जवान सोमवार को मानीराम के आस-पास के बाढ़ प्रभावित गांवों में दोपहर एक बजे राहत बचाव कार्य शुरू कर सके। पेट्रोल पहुंचने में अभी और देरी होती अगर संयोग से कमिश्नर अनिल कुमार और डीआईजी नीलाब्जा चौधरी न पहुंचते। उन्होंने नाराजगी जताई तब आनन-फानन में शहर से वहां पेट्रोल पहुंच सका। जवानों का कहना था कि वे पांच बजे से राहत बचाव कार्य शुरू कर देते हैं मगर आज एक चक्कर के बाद ही पीएसी के साथ ही एनडीआरएफ की नावों का भी तेल खत्म हो गया और वे बंधे पर चुपचाप बैठे रहे।