झंगहा से चार किलोमीटर दूर तक बाढ़ से होकर जब एनडीआरएफ की टीम बोट लेकर बरही गांव में पहुंची तो एक घर के झरोखे से कई बच्चे चिल्ला पड़े, भूख लगी है, कुछ खाने को है। जवान ने बोट न पहुंचे पाने का इशारा कर घर के बाहर आने को कहा। छोटे-छोटे बच्चे लंच पैकेट पहुंचने का इंतजार नहीं कर सके और पानी में दौड़ पड़े। पैकेट पाते ही बच्चों ने खाना खाकर भूख मिटाई। दिल को झकझोर देने वाला यह दृश्य देखकर राहत सामग्री बांटने वाले भी सन्न रह गए।
गांव तक राहत सामग्री लेकर पहुंचना भी आसान नहीं था। चारो तरफ पानी का सैलाब। कहीं बिलजी के गिरे तार तो कहीं कम पानी से बोट फंसने का डर। चौराहे से पहले ही रामदीन के घर के रास्ते बोट बरही पुलिस चौकी तक पहुंचने में कामयाब हुई। एनडीआरएफ के जवान नीरज ने सीटी बजानी शुरू की तो बहुत सारे लोग छतों से उतरकर पानी में आ गए। इन्हीं के बीच दो मासूम सोनी और सूरज भी थे। तुतलाती आवाज में दोनोें हाथ फैलाकर बोले, हमें भी पैकेट दे दो अंकल। मासूमों को निहारते हुए जवान ने उन्हें दो पैकेट दिए। दरअसल, शनिवार को इस इलाके में बाढ़ आई और सोमवार को दोपहर बाद पहली बार राहत पैकेट पहुंचा था। गांव के श्रीराम गुप्ता ने बताया कि कल रात से खाना नसीब नहीं हो सका। बिस्किट खाकर हम लोग हैं। यह कहते ही वे खुद को रोक नहीं सके और फफक पड़े। सिसकते हुए बोले, हम लोग तो भूख सहन कर ले रहे हैं लेकिन बच्चे जब रोने लग रहे हैं तो देखा नहीं जा रहा। गांव की विद्यावती देवी प्रशासनिक इंतजाम से बेहद खफा थीं। बोलीं, घर में पानी आने से सब कुछ भींग गया है। छत पर आटा और चावल तो पहुंचा दिया लेकिन लहना (जलौनी लकड़ी) छूट गया। पकाने का इंतजाम नहीं है। एक दिन तो बच्चों को पड़ोसी ने खिला दिया। लेकिन उनके घर की स्थिति भी यही हो गई है। यहां कोई अधिकारी झांकने तक नहंी आया।
औरत डूब जाएगी तो जिंदा कर दोगे
बरगदवां गांव के रामबचन बेहद गुस्से में थे। गांव के कई लोगों के साथ झंगहा पुल के पास पहुंचे और बचाव व राहत कार्य में लगे अधिकारियों पर बरस पड़े। कहा कि 24 घंटे हो गए हैं हम लोगों ने नाव मांगी थी। घर की औरतें तीन से चार फीट तक बाढ़ में आ रही हैं। कोई औरत डूब जाएगी तो जिंदा कर दोगे। उनकी बातों को सुनने के बाद एनडीआरएफ के टीम कमांडर मनीष सोनी ने अपनी बेबसी बताई। बोले, एक बोट खराब पड़ी है, मैकेनिक को बुलाया है। दो बोट सुबह से लोगों को निकालने गई है। आने दें, जरूर भेजेंगे। मारेंगे, पीटेंगे, हंगामा करेंगे तो हम आपकी मदद कैसे करेंगे।
पुलिस वाले भी दो दिन से भूखे
बाढ़ में बरही चौकी भी डूब गई है। यहां एक दरोगा और छह सिपाही हैं। बाढ़ आई तो रसोइयां अपने घर निकल गया। चौकी से सारा सामान निकालकर सिपाहियों ने बगल में इंटर कॉलेज में रख दिया था। सिपाही जयप्रकाश ने बताया कि दूसरा दिन है खाना नसीब नहीं हुआ। चौराहे पर चाय की दुकान थी, उसमें पानी घुस गया। अभी लंच पैकेट आया तो खाया है। चौकी प्रभारी ने एनडीआरएफ की टीम से अनुरोध किया, भाई साहब चौकी डूब गई है हमें थाने पहुुंचा दो। इसके बाद बोट पर आठ रायफल और कागजात रखी पेटी को रखा गया।
सास बाढ़ में फंसी हैं हमें भी पहुंचा दो
कोना गांव की चंदा बार-बार अधिकारियों से कह रही थीं, हमारी सास गांव में बाढ़ में फंसी हैं। एक लेखपाल से बोलीं, हमें भी घर पहुंचा दें। इतना ही कहते हुए सिसकने लगीं। कुछ देर बाद उन्हें नाव से भेजा गया।