हैंसर(संतकबीरनगर)। मोबाइल चोरी का आरोप लगने पर विक्रेता को न ढूंढ पाने पर आत्मघाती कदम उठाने वाले सोनू के पिता को मलाल है कि अंकित सच बता देता तो बेटा आज जीवित होता। सूत्रों के मुताबिक सोनू को पुलिस द्वारा पकड़ने की जानकारी मिलते ही घर छोड़कर चला गया।
मोबाइल चोरी के आरोप के चलते सुसाइड करने वाले सोनू(20) के पिता हरिचरन के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। रविवार सुबह बेटे का शव थाने लेकर पहुंचे हरिचरन ने बहुत कुरेदने पर फफक पड़े और बताया कि बेटा दस दिन पहले ही दिल्ली से कमाकर घर लौटा था। बगल के गांव के अंकित के आग्रह पर सोनू ने मोबाइल खरीदा था। शुक्रवार को लॉक तुड़वाने जब वह हैंसर बाजार की दुकान पर गया तो वहां मोबाइल बेचने वाले अंकित के पिता और पेशे से प्राइवेट शिक्षक वहां पहुंचे और खुद का मोबाइल होने का दावा करते हुए सोनू को पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने पूछताछ के बाद सोनू को अंकित को ढूंढकर लाने की हिदायत पर छोड़ दिया। मैंने खुद बेटे के साथ अंकित को तलाशा पर वह नहीं मिला। हरिचरन का दर्द है कि अगर अंकित अपने पिता से सच्चाई बता देता तो सोनू आत्महत्या जैसा कायरता पूर्ण कदम नहीं उठाता। एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि जिस शख्स ने सोनू पर मोबाइल चोरी का आरोप मढ़ा था उससे भी पुलिस पूछताछ करेगी। पुलिस ने सोनू को मोबाइल बेचने वाले अंकित के बारे में सिर्फ जानकारी होने पर सूचना देेेने की बात कही थी। सुसाइड नोट में सोनू ने अंकित को नहीं ढूंढ पाने पर आत्महत्या करने का जिक्र किया है।
वहीं सोनू की मौत के पहले तो पुलिस ने पंचनामे के शव घर वालों को सौंप दिया। शनिवार देररात पोस्टमार्टम का निर्णय लिया गया। इसकी सूचना पर घरवाले गांव के लोगोें के साथ शव थाने लेकर पहुंचे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया से सरयू के बिडहर घाट पर अंतिम संस्कार तक पुलिस टीम मुस्तैद रही।
मां के सामने ही सोनू ने लिखा था सुसाइड नोट
संतकबीरनगर। काश मैं शिक्षित होती तो आज बेटा मेरे सामने होता। यह दर्द है सोनू की मां चानमती(50) का। रोते हुए चानमति ने बताया कि बेटा शनिवार दोपहर एक बजे दरवाजे पर बैठकर कागज पर कुछ लिख रहा था। उन्होंने समझा की कुछ लिख-पढ़ रहा है। इसके करीब 15 मिनट बाद कमरे से कुछ गिरने की आवाज आई तो वह दौड़ीं और देखा तो सोनू फंदे पर लटक रहा था। उनकी शोर मचाने पर लोग जुटे और सोनू को सीएचसी मलौली ले गए। जहां डॉक्टराें ने मृत घोषित कर दिया। चानमती के अनुसार, अगर वह शिक्षित होती तो बेटे के लिख रहे शब्दों को जान लेतीं और किसी भी तरह उसे आत्मघाती कदम नहीं उठाने देंती।