गोरखपुर। पानी में उगने वाले काफी पौधे आपने देखे होंगे लेकिन मिट्टी में उगने वाले पौधे भी पानी में फलने-फूलने लगें तो अचरज जरूर होगा। आजकल एक अनोखी विधि का इस्तेमाल हो रहा है, जिसे हम हाइड्रोपोनिक्स या जल कृषि कहते हैं। इस विधि से बिना मिट्टी के पौधा बढ़ता है। पानी में घुले खनिज और पोषक तत्वों से पौधे का विकास होता है।
इसी तकनीक का इस्तेमाल कर पटना से आए जावेद आलम क्षेत्रीय नक्षत्रशाला में आयोजित मंडल स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शनी जिले के 50 स्कूलों से आए विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस तकनीक की जानकारी जावेद से ली। जावेद ने बताया कि 30 साल पहले वो पटना स्थित श्री कृष्ण विज्ञान केंद्र में एजुकेटर के तौर पर कार्यरत थे लेकिन हाइड्रोपोनिक्स में रुचि के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी और इस विधि के विकास पर काम करने लगे।
विकसित किया बायोफोर्ट एम
नौकरी छोड़ने के बाद जावेद ने बायोफोर्ट एम विकसित किया। एक मिलीलीटर बायोफोर्ट एम को एक लीटर पानी में मिलाकर तैयार घोल में 30 से 40 सेंटीमीटर तक लंबे पौधे को एक साल तक पोषण मिलता है। कुछ पौधों की विकास दर के आधार पर बायोफोर्ट एम की और मात्रा कुछ दिनों पर पानी में डालनी पड़ती है। जावेद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के साथ मिलकर हाइड्रोपोनिक्स को बड़े पैमाने पर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। वह विदेशों में भी इस तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए कई बार जा चुके हैं।
जगह नहीं है तो बोतल में लगाएं फूलदार पौधे
जावेद ने बताया कि अब तक गेंदा, गुलाब व अन्य तरह के 250 से ज्यादा पौधों को वे पानी में उगा चुके हैं। अगर आपके पास जगह की कमी है तो इस विधि से बॉटल गार्डेन, ट्यूब गार्डेन, रूम गार्डेन, टेबल गार्डेन, वाल गार्डेन, विंडो गार्डेन, बालकनी गार्डेन और हैगिंग गार्डेन भी विकसित कर सकते हैं।