गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत सप्ताह समारोह के अंतर्गत शुक्रवार को आयोजित काव्यांजलि कार्यक्रम में युवाओं की ओर से एक से बढ़कर एक पेश शायरी, कविता और गजलों ने श्रोताओं की वाहवाही लूटी। मो. सलीम के ‘... मैं चाहता हूं जिसे वो टूट कर नहीं आता’ नज्म ने समा बांध दिया, तो अतुल कृष्ण मिश्र की गजल ‘.... मोहब्बत ने मोहब्बत से हमें बर्बाद कर डाला’ पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। हास्य कवि अमित के भोजपुरी अंदाज ने सभी को गुदगुदाया।
एक ओर जहां कवयित्री अर्पण वत्स ने ‘नाइट्रोजन ऑक्साइड सी प्रेम प्रतिष्ठा फैली रहे’ पंक्तियों से विज्ञान और साहित्य का संयोग प्रस्तुत किया तो दूसरी ओर कुंवर प्रताप गुप्त ने पद्मावती विवाद को आइना दिखाते हुए ‘....महारानी पद्मिनी के जौहर पर फौलादी तलवारों की झनकार सुनाई देती है। रानी पद्मा के जौहर की आह सुनाई देती है’ पंक्तियों से माहौल में जोश भर दिया। वादिनी यादव ने अपने शेरों से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी तो वहीं हर्षवर्धन सिंह और आदित्य धर द्विवेदी ने कश्मीर की चुनौती पर बेहद जोशीले अंदाज में वीर रस की कविता पढ़कर पूरे सभा मंडल की जमकर तालियां बटोरीं। युवा कवियित्री सुभद्रा मणि, शिवांगी गोयल, शुभांगी मिश्र ने बेटियों की रक्षा, छेड़खानी, मातृत्व और नारी समस्याओं पर भावमयी कविताएं सुनाईं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय और विशिष्ट अतिथि कुलपति की पत्नी गीता सिंह रहीं। अध्यक्षता कुलपति प्रो. वीके सिंह ने की। कार्यक्रम संयोजक प्रो. आरडी राय ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन प्रो. सुषमा पांडेय ने किया। शोध छात्र गौरव पांडेय ने मंच पर अध्यक्षता की। संचालन का दायित्व शुभेंद्र सत्यदेव और आनंद त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से निभाया।
इन्होंने दी प्रस्तुति
मृदुत्प्ल निलोर्मि गुप्त, चंदन कुमार, ऋषभ पांडेय, पीयूष त्रिपाठी, जावेद खान, शशिकांत पांडेय, ज़ियाउल हक, कासिम रज़ा, अतुल कृष्ण मिश्र, मोहम्मद सलीम, भीमसेन सिंह, अविनाश भारती, गणेश पाठक, रविकांत पांडेय, अभय सिंह, राकेश गुप्त, पीयूष रंजन, हर्षित मिश्र आदि नवोदित कवियों ने अलग-अलग विधाओं में काव्यपाठ किया और श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।