पैगंबर-ए-इस्लाम की यौम-ए-पैदाइश का पर्व ईद मिलादुन्नबी शनिवार को अकीदत के साथ मनेेगा। शुक्रवार को जगह-जगह महफिल-ए-मिलाद की तैयारियां चलती रहीं। घरों, मस्जिदों में मिलाद की महफिल, कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी, नात ख्वानी शुरू हो चुकी है। मस्जिदों और दरगाहों को फूलों, झालरों, गुब्बारों आदि से सजाया गया है। शनिवार सुबह शहर की तमाम मस्जिदों पर परचम कुशाई होगी। या नबी सलाम अलैका, या रसूल सलाम अलैका, मुस्तफा जाने रहमत पर लाखों सलाम जैसी सदाओं से शहर की फजा गूंज उठेगी।
वहीं शुक्रवार को भी ईद मिलादुन्नबी के उपलक्ष्य में आयोजन चलते रहे। नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर 12 दिवसीय महफिल-ए-सीरतुन्नबी में 11वें दिन दर्स का सिलसिला जारी रहा। मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने मिलाद का मतलब समझाते हुए पैगंबर-ए-इस्लाम के जीवन और उनके उपदेशों पर रोशनी डाली। इस मौके पर मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, इकरार अहमद, मंजूर आलम, अहमद फराज आदि मौजूद रहे।
मोहल्ला गाजी रौजा मरहूम काजी नईमुर्रहमान के अहाता में रात्रि नमाज बाद जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का आयोजन हुआ। इसमें मुफ्ती अख्तर हुसैन ने ईद मिलादुन्नबी पर रोशनी डाली। मौलाना फैजुल्लाह कादरी ने कहा कि पैगंबर ने इंसानों को जीने का सलीका बताया। आखिर में सलातो-सलाम पेश कर दुआ मांगी गई। इस दौरान काजी ईनामुर्रहमान, फरहानुर्रहमान, ताबिश, सिराज, शहबाज, फहीम, मोहम्मद आजम आदि मौजूद रहे।
बच्चों का जुलूस-ए-मोहम्मदी निकला
दावत-ए-इस्लामी हिंद गोरखपुर की जानिब से बच्चों ने शुक्रवार दोपहर दो बजे कुरैशिया मस्जिद खूनीपुर से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाली। बच्चे हाथों में झंडा व सर पर अमामा पहने हुए नात शरीफ पढ़ते हुए जहां से निकले, लोग देखते ही रह गए। विभिन्न इलाकों में बच्चों के जुलूस ने मोहब्बत का पैगाम आम किया।
जगह-जगह से निकलेगा जुलूस
पैगंबर मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश पर शनिवार को देर रात तक जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाली जाएगी। नखास इन जुलूसों का केंद्र रहेगा। अधिकतर जुलूस यहीं से गुजरेंगे। इनमें पैगंबर के जीवन, कुरआन और हदीस से जुड़ी झांकियां व मस्जिदों के माडल आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
मूए मुबारक की होगी जियारत
छोटे काजीपुर व बड़े काजीपुर में मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश पर दोपहर तीन बजे पैगंबर-ए-इस्लाम के मूए मुबारक (पवित्र बाल) की जियारत कराई जाएगी। बड़ी संख्या में जायरीन देश व समाज के अमन-चैन की खातिर दुआएं करेंगे।