गोरखपुर। तकनीकी शिक्षा के नाम पर मनमानी फीस वसूली करने वाले निजी आईटीआई कॉलेजों पर शिकंजा कस दिया गया है। शासन ने तकनीकी कोर्स की सालाना फीस 18 हजार और गैर तकनीकी की 15 हजार रुपये निर्धारित कर दी है। अगस्त से शुरू होने वाले नए सत्र (2019-20) से न केवल इन संस्थानों में प्रवेश से पहले विभाग की वेबसाइट पर विद्यार्थियों का पंजीयन कराना होगा, बल्कि निर्धारित फीस ही लेनी होगी।
पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट की भांति अब व्यवसायिक शिक्षा परिषद की प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से ही निजी आईटीआई कॉलेजों में भी दाखिले होंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग की ओर से फीस का निर्धारण भी किया गया है। नई व्यवस्था से जिले के 124 निजी आईटीआई में पढ़ने वाले 12 हजार विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। इसके लिए संस्थानों की ग्रेडिंग और मूलभूत सुविधाओं का सर्वे शासन ने पिछले वर्ष ही करा लिया था। बार-बार मनमानी फीस वसूले जाने की मिल रही शिकायतों के मद्देनजर शासन ने पहली बार निजी आईटीआई कॉलेजों की फीस निर्धारित की है।
तीन साल तक नहीं होगा बदलाव
निजी संस्थानों के लिए लागू फीस में तीन साल तक कोई बदलाव नहीं होगा। ये व्यवस्था सत्र 2018-19, 2019-20 और 2020-21 में लागू रहेगी। फीस निर्धारण का मामला वर्ष 2014 से ही चल रहा है। पहली बार अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने निजी संस्थानों के लिए फीस निर्धारित किया थी मगर बाद में इसका विरोध हुआ। निजी आईटीआई संगठनों का कहना था कि सभी निजी संस्थानों में एक सरीखे संसाधन नहीं हैं। ऐसे में फीस निर्धारण तार्किक नहीं है। इसके बाद शासन ने बुनियादी सुविधाओं की जांच की और अब इसे लागू करने का फैसला लिया है। आदेश की अवहेलना करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई होगी।
ये हैं कोर्स
तकनीकी कोर्स- टर्नर, फीटर, मशीनिस्ट, ऑटो मोबाइल, वायरमैन, डीजल मैकेनिक, ट्रैक्टर मैकेनिक, रेफ्रीजरेशन एंड एयर कंडीशन, वेल्डर
गैर तकनीकी कोर्स- कटिंग, टेलरिंग, ब्यूटी पार्लर, ड्रेस मेकिंग, फैशन टेक्नोलॉजी और कोपा
सभी निजी संस्थानों का फीस निर्धारण कर दिया गया है। अगस्त से शुरू होने वाले सत्र में इसे लागू किया जाएगा। निर्धारित फीस से अधिक फीस वसूलने वाले संस्थानों पर र्कारवाई होगी।
- राजेश राम, जेडी, आईटीआई
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