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साहसी ...सशक्त..... प्ररेणादायिनी....अपराजिता

Mon, 31 Dec 2018 11:35 PM IST
ajay Kumar Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
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अपराजिता मुहिम के तहत मुख्य अतिथि शालिनी सिंह ने अंशिका वर्मा, मीना सिंह और रेखा मिश्रा को सम्मानित किया। - फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। 14 साल की बच्ची लुटेरों से भिड़ जाए। टेम्पो पलटने से जो खुद घायल होने के बावजूद गंभीर घायलों की जान बचाने की फिक्र करे। किसी ने पर्स छीना तो दौड़ाकर दबोच ले। जिसकी तेजी ही उसकी पहचान हो, पुलिस की वह गाड़ी चलाने को पूरे फोर्स से एक अकेली महिला का आगे आना। साहस, संवेदना और सरोकारों की ये तस्वीर रचने वाली वीरांगनाएं, अपराजिता ही तो हैं। अमर उजाला ने सोमवार को ऐसी ही तीन वीरांगनाओं का अभिनंदन कर 2018 को यादगार विदाई दी और 2019 का स्वागत भी किया।
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अमर उजाला के सिटी आफिस में एक सादे लेकिन भाव की भव्यता से भरे समारोह की मुख्य अतिथि वह महिला थानाध्यक्ष डॉ. शालिनी सिंह थीं।

अपनी ड्यूटी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लेने वाली डॉ. शालिनी ने अमर उजाला की ओर से बुके और स्मृति चिह्न देकर अंशिका वर्मा, मीना सिंह और रेखा मिश्रा का अभिनंदन किया। कहा, ‘आप सबको सम्मानित करना मेरे लिए भी गौरव की बात है।’ इन वीरांगनाओं की साहस कथा दूसरी महिलाओं के लिए अपराजिता बनने की प्रेरणा है। शहरवासियों के लिए यह संदेश भी कि कहीं कोई घायल पड़ा दिखे तो उसका वीडियो बनाने की जगह उसे अस्पताल पहुंचाने की सोचें। आइए, जानें इन बेटियों के कमाल को....

लुटेरे खींचकर बाइक से गिराया

बात 27 मई 2017 की है। बरडाड़ स्थित सराफे की दुकान से पिता कृष्ण कुमार के साथ घर खजनी लौट रही थी। रास्ते में एक ही बाइक पर सवार तीन बदमाश पीछे पड़ गए। एक ने मेरे हाथ से आभूषणों का झोला छीनने की कोशिश की तो मैं मुंह बांधे बदमाश पर झपटी। उसका गमछा हाथ आया। पूरी ताकत से खींचा तो वह जमीन पर गिर गया। पापा ने भी ईंट उठाकर एक के सिर पर दे मारा। एक पकड़ा गया पर दो भाग निकले। बदमाशों से न तब डरी और न अब डरती हूं।
-अंशिका वर्मा, 9वीं की छात्रा, हेरिटेज एकेडमी, बरडाड

जान बचाकर मिला संतोष

जब भी वह वाकया याद करती हूं, रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बात तीन साल पहले की है। यहां आना-जाना लगा ही रहता है। गोरखनाथ में टेंपो पलटने से मुझे चोट आई, लेकिन उसमें सवार दो लोगों की दशा गंभीर थी। मैं मदद की गुहार लगा रही थी, पर लोग वीडियो बना रहे थे। काफी हाथ-पैर जोड़ने के बाद एक टेंपो वाला मदद के लिए राजी हुआ। दोनों घायलों को जिला अस्पताल लाई। एक की जान बच सकी। इसके बाद बीआरडी जाकर अपना प्लास्टर कराया।
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मीना सिंह, भागलपुर में मेडिकल छात्रा

यह चुनौती मुझे मंजूर थी

परिवार में कार थी। एक परिजन की तबियत बिगड़ी तो गांव में ड्राइवर नहीं मिला। मुझे तब बहुत दुख हुआ था। इसीलिए कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ड्राइविंग सीखी। कुछ नया करने की चाह तो हमेशा रही। पुलिस की नौकरी के दौरान जब डायल 100 के पायलट के लिए आवेदन मांगे गए तो मैंने दावेदारी पेश की। जानती थी यह काम चुनौती से भरा है लेकिन अपनी ड्राइविंग के कौशल पर भरोसा था। कुछ लोग हैरानी से देखते हैं, पर मैं अपना काम करती रहती हूं।
रेखा मिश्रा, पायलट डायल 100

घर जाकर किया सम्मान

गोरखनाथ इलाके में रहने वाली सुरभि अपरिहार्य कारणों से न आ सकीं तो अमर उजाला टीम ने उनके घर पहुंचकर उनका अभिनंदन किया। उनकी हिम्मत बीते 18 दिसंबर को सामने आई। गोरखनाथ ओवरब्रिज के पास बाइकसवार बदमाशों ने पर्स छीन लिया तो वह चीखी-चिल्लाई नहीं, उनके पीछे दौड़ पड़ीं। एक को बाइक से खींचा तो सभी नीचे गिर गए। उनके हौसले से एक पकड़ा भी गया। उसके दोनों साथी बाइक छोड़कर भाग गए।
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