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हाकिमों की नाकामी ने तैयार किया राजनीति का मंच

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गोरखपुर।
एक दशक से उलझे मानबेला की जमीन के मुआवजे के जिस मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद दखल देकर सुलझाया था, उसे हाकिमों ने उलझा दिया है। प्रशासन और प्राधिकरण के आला अफसरों की अदूरदर्शिता से एक बार फिर मानबेला राजनीति का अखाड़ा हो गया है। किसानों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे कांग्रेसी नेता राणा राहुल सिंह के नेतृत्व को और मजबूत बनाने के लिए शनिवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर गोरखपुर पहुंच रहे हैं। वे सुबह 10 बजे लखनऊ से सड़क मार्ग से तीन बजे मानबेला पहुंचेंगे और किसानों के बीच दो घंटे रहेंगे। विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद सुस्त पड़े जिले के कांग्रेस कार्यकर्ता किसानाें के इस आंदोलन के बहाने फिर से सक्रिय होते दिख रहे हैं।
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पहले अफसर मुकरे अब किसानों ने जोड़ी नई शर्तें
गोरखपुर। मुख्यमंत्री की पहल पर जीडीए ने मानबेला के करीब 1100 किसानों को मुआवजे की रकम बढ़ाकर 70 लाख प्रति हेक्टेयर के हिसाब से देने का निर्णय किया था। समझौते की शर्तों के मुताबिक मानबेला की 10 फीसदी जमीन भी किसानों के लिए सुरक्षित करने का निर्णय हुआ था। किसान इसपर सहमत भी हो गए थे, मगर बाद में मंडलीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एक नई शर्त जोड़ दी। कमेटी ने पूर्व में दिए गए मुआवजे पर ब्याज लगाने और उसे बढ़े हुए मुआवजे की रकम से काटने की संस्तुति की थी। किसानों का आरोप है कि उन्हें इस शर्त के बारे में पूर्व में कोई जानकारी ही नहीं दी गई वर्ना वे समझौते को तैयार ही नहीं होते। यही नहीं खफा किसान अब सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा देने और दोबारा सर्वे कर मानबेला में बन चुके मकानों, कब्रगाह, मस्जिद, मंदिर और स्कूलों को नहीं तोड़ने की मांग कर रहे हैं।
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तीसरे दिन भी जारी रहा सत्याग्रह
गोरखपुर। सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा देने समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह के नेतृत्व में मानबेला में ही चल रहा किसानों का सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी रहा। किसानों का कहना है कि जब तक प्राधिकरण उनकी सभी मांगों को नहीं मान लेता वे आंदोलन जारी रखेंगे। इस दौरान मुस्ताक अहमद, गिरीश चौबे, आजाद घोसी, विजय लाल, मो. इरफान, राम अक्षयभर मौर्या, बृजेश मौर्या, राजेंद्र मौर्या, प्रिंस गुप्ता, मकसूद अहमद, संतराज यादव आदि मौजूद रहे।

कोट
जीडीए के अफसरों को किसानों से संवाद कायम करने निर्देश दिया है। बात चल रही है।
- अनिल कुमार, कमिश्नर
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