गोरखपुर।
पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में उधार की फायरिंग बट (शूटिंग रेंज) से काम चल रहा है। इस वजह से प्रशिक्षण ले रहे तमाम रिक्रूटों को फायरिंग की ट्रेनिंग के लिए चुनार (मिर्जापुर) जाना पड़ता है। अफसरों की ट्रेनिंग भी काम चलाऊ है। ज्यादातर अफसरों को एयरफोर्स की फायरिंग बट से ट्रेनिंग दी जाती है। यह तभी संभव होता है, जब एयरफोर्स से अनुमति मिलती है। पुलिस ट्रेनिंग और फायरिंग का पैटर्न भी पुराना है।
भर्ती होने के बाद ही सशक्त पुलिस तैयार करने की जिम्मेदारी ट्रेनिंग स्कूल की होती है। यहां ट्रेनिंग के दौरान दौड़ से लेकर, निशानेबाजी तक का मानक तय है मगर गोरखपुर में 32 सालों से पुलिस की ट्रेनिंग के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही हो रही है। एयरफोर्स के पास मौजूद शूटिंग रेंज में कुछ पुलिसवालों को निशानेबाजी के लिए भेजा जाता है। काफी सिफारिश के बाद कुछ ही पुलिस वालों को यह मौका मिल पाता है। वहीं आज भी ट्रेनिंग के लिए अत्याधुनिक असलहों को शामिल नहीं किया जा सका है। पुलिस के पास एमपी फाइव गन, ग्लाक पिस्टल और रिपिटर जैसे आधुनिक असलहे हैं लेकिन ट्रेनिंग को आज भी 303 बोर राइफल और एके 47 ही दिया जाता है।
सीएम सिटी होने पर खुला था ट्रेनिंग स्कूल
वीर बहादुर सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद सीएम सिटी होने पर 1986 में गोरखपुर में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की गई। बिछिया के पीएसी मैदान में प्रशिक्षण की अस्थाई व्यवस्था की गई। उप निरीक्षक, कांस्टेबल की ट्रेनिंग शुरू हुई, मगर इसके बाद कभी भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और आज भी इसे स्थायी नहीं किया जा सका। ट्रेनिंग सेंटर पीएसी की जमीन पर है पर यहां सुविधा-संसाधन मानक के अनुकूल नहीं हैं।
तीन दशक में नहीं खोज पाए जमीन
करीब तीन दशक बाद भी पीटीएम के लिए खुद की जमीन नहीं मिल पाई। समय-समय पर अधिकारियों ने जमीन के लिए पत्राचार किया। लखनऊ, इलाहाबाद तक फाइल दौड़ती रहीं लेकिन जमीन नहीं मिली। पुलिस ट्रेनिंग विद्यालय के प्रतिसार निरीक्षक आदित्य नारायन सिंह कहते हैं कि महराजगंज के सिसवा, धुरियापार चीनी मिल, सरदारनगर और गीड़ा में जमीन की तलाश हुई, मगर कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही।
पीटीएस के लिए मानक
- ट्रेनिंग के लिए कम से कम 44 एकड़ जमीन होनी चाहिए
- ट्रेनिंग स्कूल में अस्पताल की सुविधा भी होनी चाहिए
- फायरिंग बट आवश्यक रूप से होना चाहिए
- अधिकारी और प्रशिक्षु के लिए आवास सुविधा भी होनी चाहिए
कोट :
लंबे समय से जमीन की तलाश की जा रही है। कई अधिकारियों ने प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। पीएसी की जमीन से काम चलाया जा रहा है लेकिन संसाधन पीटीएस के हैं।
- कैलाश सिंह, पुलिस अधीक्षक, पीटीएस, गोरखपुर