बखिरा(संतकबीरनगर)। रक्साकोल गांव निवासी और सीआरपीएफ के प्रशिक्षु सुनील कुमार शर्मा का शव रविवार को गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही गांव और आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी गई। वहीं बेटे का शव देखते ही पिता विश्वंभर, मां, भाई व बहन दहाड़ मारकर विलाप करने लगे। छह जुलाई को सूरतगढ़(राजस्थान) में रेलवे ट्रैक पार करते समय सुनील की मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
घरवालों के अनुसार, रक्साकोल निवासी 22 वर्षीय सुनील कुमार शर्मा पुत्र विश्वभंर शर्मा दो साल पहले सीआरपीएफ में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए थे। अमेठी के त्रिसुंडी सीआरपीएफ कैंप से बुलावा पत्र आने के बाद 19 अप्रैल 2017 को राजस्थान के सूरतगढ़ स्थित ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण के लिए रवाना हुए थे और 21 अप्रैल से प्रशिक्षण शुरू हुआ था।
सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर राम अवतार ने बताया कि रिक्रूट सुनील कुमार की 44 सप्ताह की ट्रेनिंग चल रही थी। इसमें से वह 11 सप्ताह की ट्रेनिंग पूरी कर चुके थे। छह जुलाई को कांस्टेबल सतीश के साथ कुल 12 रिक्रूट कुछ जरूरी सामानों की खरीदारी के लिए ट्रेनिंग कैंप से कुछ ही दूरी पर स्थित सूरतगढ़ गए हुए थे। सामान लेकर 11 रिक्रूट कैंप में लौट चुके थे, लेकिन सुनील निर्धारित समय में नहीं लौटे तो खोजबीन शुरू की गई। शाम को करीब पांच बजे जीआरपी के एक पुलिस कर्मी ने मोबाइल से सूचना दी कि रेलवे ट्रैक पर एक जवान का शव मिला है। बाद में पता चला कि सुनील कुमार की ट्रैक पार करते समय मालगाड़ी की चपेट में आ जाने से मौत हो गई। शव बुरी तरह से क्षत विक्षत हो गया था। ऐसे में जूते पर पड़े नंबर से शव की पहचान हुई। अवध आसाम एक्सप्रेस से शव शनिवार रात खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। सुबह छह बजे शव लेकर जवान गांव पहुंचे। शिवापार स्थित आमी के इमिलिया तट पर सीआरपीएफ जवानों द्वारा सलामी दिए जाने के बाद पिता ने बेटे को मुखाग्नि दी। सीआरपीएफ के सबइंस्पेक्टर रामअवतार के साथ हेडकांस्टेबल दिलीप, कांस्टेबल पीपी राय, फैजाबाद 63वीं बटालियन के इंस्पेक्टर पंकज वर्मा समेत कुल आठ लोग आए थे। इस दौरान थानाध्यक्ष रामभवन यादव, चौकी इंचार्ज प्रदीप सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मी भी मौजूद रहे।
‘... तो कहीं जाने नहीं देता’
बखिरा। पिता विश्वंभर ने बताया कि उनके दो बेटों में बड़ा बेटा अनिल घर पर रहकर खेती में उनका हाथ बंटाता है और सहज जनसेवा केंद्र चलाता है। जबकि छोटा बेटा सुनील स्नातक के उपरांत भर्ती की तैयारी कर रहा था। बेटे को अभी हाल ही में सीआरपीएफ में नौकरी मिलने से पूरा परिवार खुश था। सबसे अधिक खुशी उसकी मां उर्मिला को थी। अभी उसने 11 सप्ताह की ट्रेनिंग ही पूरी की थी। क्या पता था कि भर्ती होकर ट्रेनिंग भी पूरी नहीं कर पाएगा, अन्यथा उसको घर पर ही रखते, कहीं भी जाने नहीं देते। कलेजे का टुकड़ा उसकी आंखों से ओझल हो गया। उसकी शादी भी अभी नहीं कर सका था। शादी की बातचीत कई जगह चल रही थी, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। इतना बताते हुए पिता रोने लगे। गांव के लोग बूढे़ पिता को सांत्वना दे रहे थे।