रामगढ़ताल वेट लैंड के मामले में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा गठित हाई पावर कमेटी के सामने अपना पक्ष रखा है। प्राधिकरण ने 103 पन्नों में कमेटी को सौंपे प्रत्यावेदन में ताल के वेट लैंड को बचाने के लिए मकानों को ध्वस्त कराने की कार्रवाई छोड़ हर खामी जल्द दूर करने का भरोसा दिलाया है। प्राधिकरण ने वेट लैंड के नोटिफिकेशन और बिल्डिंग बायलॉज आदि का हवाला देते हुए ताल किनारे के हर मकान बचाने की कमेटी से गुहार लगाई है। कमेटी 17 जून को प्रत्यावेदन पढ़ेगी।
इसके बाद ही मालूम चलेगा कि कमेटी प्राधिकरण की दलीलों से संतुष्ट है या नहीं और है तो कितना और किन-किन मामलों में। जीडीए के सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि कमेटी को अपनी संस्तुति पर फिर विचार करने के लिए सिफारिश की गई है। प्राधिकरण ने अपना प्रत्यावेदन 13 जून को कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह को सौंप दिया है।
इसलिए है हड़कंप
रामगढ़ताल वेट लैंड मामले में एनजीटी की हाई पावर कमेटी ने पिछले महीने अपनी फ ाइनल रिपार्ट लगा दी। रिपोर्ट में कमेटी ने बहुत सख्त संस्तुति करते हुए एनजीटी से रामगढ़ताल के पांच सौ मीटर के दायरे में बने सभी निर्माण छह महीने के भीतर जीडीए से ध्वस्त कराने की सिफारिश की है। एनजीटी के पूर्वी यूपी की नदियों एवं जल संरक्षण निगरानी समिति के सचिव राजेंद्र सिंह की तरफ से की गई संस्तुति की रिपोर्ट में सर्किट हाउस, एनेक्सी और चिड़ियाघर को इस कार्रवाई से बाहर रखा है।
उन्होंने वेट लैंड के मामले में न्यायालयों के पिछले कई आदेश, हाई पावर कमेटी और रिजुवेनेशन (कायाकल्प) कमेटी की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए ताल के 500 मीटर के दायरे में पर्यावरण विभाग की मंजूरी के बिना हुए सभी निर्माण को अवैध बताया है। इसी के बाद रामगढ़ताल किनारे बसे शहर के बड़े हिस्से में रह रहे हजारों लोगों में हड़कंप मची है।
जीडीए का तो वजूद ही दांव पर
हाई पावर कमेटी की संस्तुति को अगर एनजीटी ने मान लिया तोे जीडीए के सामने अपना वजूद बचाने का भी संकट खड़ा हो जाएगा। वसुंधरा फेज एक, दो और तीन के अलावा लोहिया समेत प्राधिकरण की कई बड़ी आवासीय व व्यवसायिक परियोजनाएं कार्रवाई की जद में आ रही हैं। इनका नुकसान उठाने के साथ ही प्राधिकरण को मुआवजा आदि को लेकर हजारों करोड़ रुपये का झटका लगेगा।
हमारा किसी से व्यक्तिगत विरोध नहीं। वेट लैंड संरक्षण के लिए ही एनजीटी ने कमेटी का गठन किया है। वेट लैंड से जुड़े कानून का ही कमेटी पालन कर रही है, उसी कानून के मुताबिक ही रामगढ़ताल वेट लैंड को लेकर एनजीटी से कार्रवाई की संस्तुति की गई है। जीडीए का प्रत्यावेदन मिल गया है। कमेटी 17 जून को उसका अध्ययन करेगी।
राजेंद्र सिंह, अध्यक्ष, हाई पावर कमेटी, एनजीटी
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