संशोधित
भाषण बाद में दिजिएगा, पहले हमारी सुनिए
बिफरे कार्यकर्ता, बसपा की बैठक में जमकर हंगामा-नारेबाजी
टिकट वितरण में अनसुनी पर नाराज थे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। चुनाव बाद मंडल स्तर की बसपा की समीक्षा बैठक में गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। चुनाव में निष्क्रिय रहने वालों को तवज्जो देने और कार्यकर्ताओं की बातें अनसुनी करने पर बहुत सारे सेक्टर और बूथ पदाधिकारी भड़क गए। आधे घंटे तक जमकर हंगामा हुआ। पार्टी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी हुई। कार्यकर्ताओं ने बड़े नेताओं के खिलाफ अपशब्द भी कहे। कुछ नेता बीच बैठक छोड़कर चले भी गए। कार्यकर्ताओं ने बड़े नेताओं से कहा, भाषण बाद में दिजिएगा पहले हमारी सुनिए।
शहर के गोकुल अतिथि भवन में शुरू हुई बसपा की बैठक में मंडल के चारों जिलों के पदाधिकारियों ने हार की वजहें गिनाने शुरू कीं। इसके बाद मंडल स्तर के पदाधिकारियों को बुला लिया गया। जबकि पीछे बैठे बूथ और सेक्टर स्तर के पदाधिकारी अपनी बात भी कहना चाहते थे। बड़े नेताओं ने हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा तो दो घंटे से मौका मिलने का इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं और छोटे स्तर के नेताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि कई पदाधिकारियों ने चुनाव में मन से काम ही नहीं किया। हार की वजह वही नेता हैं। हंगामा बढ़ता देख बड़े नेता बाहर निकल गए। मुख्य अतिथि सेक्टर प्रभारी पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन नारेबाजी तेज होती गई। आरोप प्रत्यारोप के बाद गाली-गलौज भी होने लगी। फिर कुछ पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सभी को बात कहने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद हंगामा शांत हुआ।
मुख्य अतिथि त्रिभुवन दत्त ने कहा कि चुनाव परिणाम से हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। संगठन और सर्व समाज के लोग आपसी सहयोग से संघर्ष के लिए तैयार रहें। नए सिरे से पार्टी का संगठन तैयार करने में जुट जाएं। इस दौरान विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय, सेक्टर प्रभारी मदन राम, पवन गौतम, सुधीर कुमार, जिलाध्यक्ष घनश्याम राही, मंडल प्रभारी संजय एडवोकेट, रमेश पासवान, पशुपति नाथ रविकुल, एजाज अहमद, राजेंद्र राजभर, श्रवण निराला, दुलारी देवी, लीलावती देवी, भवनाथ राय आदि मौजूद रहे।
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कहां गया 1.20 लाख रुपया
कार्यकर्ताओं ने कहा कि नगर निगम का 1.20 लाख टैक्स बकाया है। पदाधिकारियों ने चंदा देकर यह रकम जुटाई थी पर जमा नहीं की गई। वह रकम कहां गई। रकम को अपने पास रखने वाले पार्टी से निकाले क्यों नहीं गए ?