न्यूजीलैंड में योग सिखाते अजय अग्रहरि।
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डुमरियागंज। लक्ष्मणनगर वार्ड निवासी साॅफ्टवेयर इंजीनियर अजय अग्रहरि न्यूजीलैंड में न केवल लोगों को योग सिखा रहे हैं बल्कि भारतीय संस्कृति के विविध आयामों से भी परिचित करा रहे हैं। यही नहीं, अपने हुनर और काबिलियत के बल पर वह लोगों को भारतीय खाने का मुरीद भी बना रहे हैं।अधिवक्ता शक्तिप्रकाश अग्रहरि के पांच बेटों और दो बेटियों में सबसे बड़े बेटे अजय उर्फ अप्पू अग्रहरि का योग से शुरू से ही लगाव रहा। सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई के दौरान सूर्य नमस्कार से वह इतने प्रभावित हुए कि योग के रंग में रम गए। उन्होंने इंटरनेट सहित अन्य साधनों से खुद योग सीखा। वह न्यूजीलैंड गए तो थे इंजीनियरिंग करने पर वहां लोगों को योग सिखाने लगे। अजय बताते हैं कि न्यूजीलैंड में इतने साल रहने के बाद भी भारतीय संस्कृति के प्रति उनका मोह कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ गया। अब तो न्यूजीलैंड के लोगों को भी भारतीय संस्कृति रास आने लगी है। न्यूजीलैंड के लोगों का संस्कृत भाषा के प्रति झुकाव बढ़ता जा रहा है। वहां भी काफी संख्या में लोग हवन कराने लगे हैं।
डुमरियागंज से हुई प्राथमिक स्तर की पढ़ाई
अजय की प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। 1998 में हाईस्कूल और 2000 में इंटरम उन्होंने पीपुल्स इंटर कॉलेज से किया। इसके बाद लखनऊ के बाबू बनारसी दास इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक किया। अजय ने देश के कई शहरों में प्राइवेट नौकरी की। वह 2011 में कनाडा के टोरंटो सिटी में बतौर साफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी करने गए। यहां एक साल नौकरी करने के बाद उन्होंने 2012 में न्यूजीलैंड के आकलैंड सिटी में क्वीनटाइल आईएमएस ज्वाइन किया।
खाने की महक और स्वाद से बना रहे दीवाना
अजय की रुचि खाना बनाने में भी है। वह न्यूजीलैंड में आयोजित इटंरनेशनल योगा फेस्टिवल, वॉइसेस ऑफ सेक्रेड अर्थ फेस्टिवल, इटंरनेशनल योगा दिवस और कम्यूनिटी डिनर-डे पर भारतीय खानपान रोटी, दाल, चावल, सब्जी, पकोड़े, हलवा, खीर और बेसन के लड्डू खुद बनाते हैं। न्यूजीलैंड में एक सोशल कंपटीशन में बेस्ट इंडियन करी बनाने पर उन्हें पुरस्कार भी मिल चुका है। बनारस में हाल ही में हुए अप्रवासी भारतीय कार्यक्रम में शामिल होने आए अजय ने बातचीत में कुंभ के आयोजन की सराहना की और न्यूजीलैंड के लोगों में इसका प्रचार-प्रसार करने का भरोसा दिलाया।