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पहले सेमेस्टर में ज्यादातर विद्यार्थी फेल

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डीएलएड के पहले सेमेस्टर के ज्यादातर विद्यार्थी फेल
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विद्यार्थियों ने कॉपियों के सही मूल्यांकन न होने की शिकायत सीएम कैंप कार्यालय में की
छह महीने की पढ़ाई नए सिरे से करनी पड़ेगी, तमाम विद्यार्थियों को देना होगा बैक पेपर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के पहले और तीसरे सेमेस्टर का रिजल्ट खराब आया है। कुछ कॉलेज ऐसे हैं, जिनके ज्यादातर विद्यार्थी फेल हैं। इस मामले की शिकायत सीएम के कैंप कार्यालय गोरखनाथ मंदिर में की गई है। परीक्षार्थियों का आरोप है कि कॉपियों का मूल्यांकन ठीक से नहीं हुआ। उनका दावा है कि कॉपी नए सिरे से जांची जाए तो परिणाम कुछ और होंगे। उन्होंने ऐसा कराने और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
डीएलएल प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम 25 सितंबर को घोषित किए गए। इसका विस्तृत ब्योरा जारी हुआ तो पता चला कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी फेल हैं। ऑल बीटीसी डीएलएड वेलफेयर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष विशाल दुबे ने बताया कि सहजनवां क्षेत्र के जयंत धर दुबे और चंपा देवी बीटीसी कॉलेज के 450 विद्यार्थियों ने पेपर दिया था। इसमें से करीब 300 विद्यार्थी फेल हैं। ज्यादातर विद्यार्थियों को छह महीने के सेमेस्टर की पढ़ाई नए सिरे से करनी होगी। तमाम विद्यार्थियों को बैक पेपर देना पड़ेगा। विशाल के मुताबिक प्रभा देवी महिला महाविद्यालय बीटीसी कॉलेज के 100 में से 75 विद्यार्थी फेल हैं। कबूतरी देवी राजेश्वर त्रिपाठी स्मारक कॉलेज के 96 में से 48 विद्यार्थी फेल हैं। दूसरे कॉलेजों का रिजल्ट भी खराब आया है। मंडल अध्यक्ष नेे अविनाश आर्यन, वीराज, अमितेश, निधि पांडेय, पुष्पा पासवान और अभिलाषा त्रिपाठी के साथ जाकर मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय में शिकायत की। आरोप लगाया कि विज्ञान संकाय की टॉपर को विज्ञान विषय में फेल किया गया है। प्रतिनिधि मंडल का दावा था कि यूपी में 48 हजार विद्यार्थी फेल किए गए हैं। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
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47 कॉलेजों में नौ हजार विद्यार्थी
गोरखपुर में डीएलएड के 47 कॉलेज हैं। इनमें करीब नौ हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। डीएलएड पहले और तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा कराई थी। इन्हीं के नतीजे घोषित किए गए हैं।
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कोट
परीक्षा नियामक प्राधिकारी इलाहाबाद से पेपर बनता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) स्तर से रिजल्ट नहीं बनता है। इस मामले में नियामक प्राधिकारी ही उचित फैसला ले सकते हैं। - जय प्रकाश, प्राचार्य डायट गोरखपुर
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