बस्ती। आधुनिकीकरण की राह पर पुलिस भले ही हो, पर अब भी कुछ मामलों में ‘टोटकों’ का सहारा लिया जाता है। गुडवर्क से शुरूआत जैसी कवायदों के साथ ही आमद के लिए सम और रवानगी के लिए विषम संख्या का इंतजार किया जाता है। यही नहीं जीडी (जनरल डायरी) में तस्करा लिखने के लिए काले रंग की स्याही इस्तेमाल भी नहीं होता है। अफसर और मातहत कारण पूछने पर हंसकर टाल देते हैं। दबी जुबां बस यही कहा जाता है कि सुरक्षित नौकरी और क्राइम कंट्रोल के लिए ऐसे पैंतरे आजमाने में क्या हर्ज।पुलिस द्वारा वर्षों से जीडी लिखने में काली स्याही वाला पेन इस्तेमाल न करने का दस्तूर आज भी कायम है। जीडी की क्रम संख्या आठ, अट्ठारह, अट्ठाइस जैसे सम क्रम संख्या पर आमद नहीं करते। तीन, तेरह और तेइस जैसी विषम क्रम संख्या होने पर रवानगी दर्ज कराने से बचते हैं। यदि इस क्रम संख्या पर उक्त पुलिसकर्मी पहुंचता है तो वह क्रम बदलने तक इंतजार करता है। एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि पुलिस नियमावली में ऐसा कुछ भी नहीं है। यदि कोई करता है उसकी अपनी मान्यता हो सकती है।
कोतवाली में जुआरियों से बोहनी
कोतवाली पुलिस चिराग तले अंधेरा का मुहावरा चरितार्थ करते हुए दो दिन तक गुडवर्क तलाश करती रही। तीसरे दिन बुधवार को तीन जुआरियों को पकड़कर बोहनी किया। पैकोलिया थाने में आबकारी एक्ट के तहत पहली कार्रवाई हुई।