गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रकरण में गिरफ्तार पूर्व प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को एंटी करप्शन कोर्ट ने गुरुवार को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। कोर्ट का आदेश सुनते ही डॉक्टर दंपती बदहवाश हो गए। पूर्व प्राचार्य के आंखों से आंसू निकल आए। डॉ. पूर्णिमा के चेहरे पर भी घबराहट देखने को मिली।
कानपुर से गिरफ्तार पूर्व प्रिंसिपल और उनकी पत्नी को गुरुवार को पहले जिला चिकित्सालय ले जाया गया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद दोपहर एक बजे के करीब कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों को एंटी करप्शन के इंचार्ज शिवानंद सिंह की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दलील सुनी और आरोपियों को जेल भेजने का आदेश पारित कर दिया। आरोपियों की पेशी के दौरान कचहरी परिसर छावनी में तब्दील हो गया था। एसपी ट्रैफिक आदित्य वर्मा और सीओ कैंट अभिषेक की मौजूदगी में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए। सुरक्षा घेरे में लेकर ही आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। करीब 30 मिनट की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जेल भेजने का फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान डॉ. पूर्णिमा शुक्ला सिर झुकाए रहीं। फैसला सुनाने से पहले उन्होंने कोर्ट रूम में खुद को निर्दोष बताया।
विवेचक का तर्क
जिला अभियोजन अधिकारी और सहायक अभियोजन अधिकारी के माध्यम से विवेचक (गुलरिहा थानाध्यक्ष) ने कहा कि विवेचना चल रही है। तमाम साक्ष्य जुटाए जाने हैं। इसलिए आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में रखा जाए। इस तर्क को कोर्ट ने माना और आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश पारित कर दिया।
डॉक्टर के अधिवक्ता का तर्क
एफआईआर देखने से कोई अपराध नहीं बन रहा है। किसी धारा को साबित करने का कोई सुबूत नहीं है। केवल मीडिया ट्रायल और शासन के दबाव में फर्जी बातें प्रथम सूचना रिपोर्ट में लिखी गई हैं। जो आरोप हैं, उसमें विभागीय जांच हो सकती है। यह सरकारी कर्मचारी सेवा नियमावली के तहत कदाचार हो सकता है। विभागीय दंड ही मिल सकते हैं। न्यायालय से दंडनीय अपराध नहीं हो सकता है।
जमानत की अर्जी नहीं पड़ी
डॉक्टर दंपती की तरफ से जमानत की अर्जी एंटी करप्शन कोर्ट में नहीं लगाई गई। चर्चा है कि मामला पूरे देश में छाया है। इस वजह से डॉक्टर दंपती ने जमानत की अर्जी नहीं दी। मामला ठंडा होगा, तभी जमानत की मांग की जाएगी। हाईकोर्ट में भी जमानत याचिका डाली जा सकती है।
डॉ. पूर्णिमा ने खुद को बताया निर्दोष
कोर्ट में पेशी के दौरान गिरफ्तार डॉ. पूर्णिमा शुक्ला ने चुप्पी तोड़ी और खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि साजिश के तहत फंसाया गया है। इन मामलों से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इतना कहना था कि महिला पुलिस कर्मचारियों ने सुरक्षा घेरा और मजबूत किया। डॉ. पूर्णिमा को खींचकर गाड़ी में बैठाया और जेल लेकर चली गईं।
डॉक्टर दंपती पर हमले की कोशिश
पेशी के दौरान कचहरी परिसर में डॉक्टर दंपती पर हमले की कोशिश की गई। लोगों ने पूर्व प्रिंसिपल से अभद्रता और गाली गलौज भी की। पुलिस को डर था कि ऑक्सीजन कमी के बीच मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत से लोगों में गुस्सा है। इसका रिएक्शन कचहरी परिसर में देखने को मिल सकता है। इसे लेकर कचहरी परिसर में सुरखा के सख्त इंतजाम किए गए। पुलिस को डॉक्टर दंपती पर हमले की आशंका थी। यह आशंका सही साबित हुई। पेशी पर आए डॉक्टर दंपती पर कचहरी परिसर में हमले की कोशिश की गई लेकिन पुलिस की सतर्कता से हमलावर कामयाब नहीं हो सके।