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एम्स के नाम हो गई जमीन

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अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर। एम्स के लिए जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया मंगलवार को पूरी हो गई। केंद्र और उप्र सरकार के अफसरों की मौजूदगी में गन्ना शोध संस्थान की 112 एकड़ जमीन एम्स के नाम रजिस्ट्री हुई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अब जल्द ही एम्स के निर्माण में जमीनी स्तर पर तेजी दिखाई देने लगेगी। सब कुछ ठीक रहा तो 2019 तक इसका निर्माण पूरा हो जाएगा और इसे इलाज के लिए खोल दिया जाएगा। एम्स के निर्माण से गोरखपुर समेत पूर्वांचल ही नहीं बल्कि बिहार और नेपाल से सटे इलाकों के लोगों को भी तमाम तरह की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अब दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू समेत बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।

महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो में स्थित गन्ना शोध संस्थान की जमीन पर पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एम्स की आधारशिला रखी थी। करीब पांच महीने पहले ही गन्ना शोध संस्थान की यह जमीन उप्र चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के नाम हो गई थी। पिछली सपा सरकार की अनदेखी और फिर विधानसभा चुनाव 2017 की वजह से यह जमीन उप्र चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग से एम्स के नाम नहीं हो पाई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर मंगलवार की दोपहर चार बजे के करीब राज्य चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के सचिव नीलेश कुमार सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव विनोद कुमार के जरिए एम्स के नाम स्थानांतरित की। रजिस्ट्री की प्रक्रिया कलेक्ट्रेट स्थित सब रजिस्ट्री द्वितीय रईस अहमद के दफ्तर में पूरी हुई।
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एक रुपये वार्षिक किराये पर 90 साल के लिए हुआ लीज
गोरखपुर। एम्स के लिए गन्ना शोध संस्थान की 112 एकड़ जमीन 90 साल के लिए एक प्रति वार्षिक किराये के दर पर स्थानांतरित हुई है। जरूरत पड़ने पर भविष्य में लीज की इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। डीएम सर्किल रेट के मुताबिक वर्तमान में इस जमीन की कीमत करीब 700 करोड़ है। सरकारी काम छोड़कर अगर किसी प्राइवेट एजेंसी द्वारा इस जमीन का बैनामा कराया जाता तो राज्य सरकार को करीब 35 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी के तौर पर मिलते।
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