गोरखपुर। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, वहां साक्षात देवता वास करते हैं। यह श्लोक बताता है कि हमारी संस्कृति में नारी को कितना सम्मानजनक स्थान मिला है। मौजूदा दौर में नारी कहीं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है तो कभी बाहर उत्पीड़ित। एक ओर हम नवरात्र में कन्या पूजन करते हैं तो दूसरी ओर गर्भ में कन्या को मारा जा रहा है। ये स्थिति हमारी संस्कृति और हमारे देश के लिए खतरनाक है। ऐसे में समाज को नारी गरिमा का साझा संकल्प दिलाने की खातिर ‘अमर उजाला’ की ओर से छेड़ी गई ‘अपराजिता’ मुहिम काबिले तारीफ है।
श्रीराम पार्क दिव्यनगर में श्रीरामकथा सेवा समिति दिव्यनगर की ओर से कथा के सातवें दिन कुलदीप महाराज ने नारी सशक्तीकरण के इस मुहिम के तहत सभी को संकल्प लेने की अपील की। उसके बाद भरत चरित्र का बड़ा सहज और कारुणिक चित्रण किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम और भरत की कथा भाई-भाई के रिश्ते का बेहतरीन उदाहरण है। यह कथा भाई के प्रति भाई के कर्तव्य समझाती सिखाती है। आज के परिवेश में भाई-भाई छोटे-छोटे झगड़ों ओर स्वार्थों के कारण अलग हो जाते हैं और एक-एक दूसरे को अपना दुश्मन तक मान लेते हैं। ऐसे में श्रीरामकथा की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने की ली शपथ
व्यास पीठ पर बैठकर कुलदीप महाराज ने ‘अपराजिता’ मुहिम का शपथपत्र भरा। साथ ही श्रद्धालुओं को मुहिम से जुड़ने की जानकारी देते हुए शपथ दिलाई। उनके साथ समिति के अध्यक्ष ध्यान प्रकाश तिवारी, सेवानिवृत्त एडीजे रामाश्रय प्रसाद ने दीप जलाकर कथा का शुभारंभ किया। वाल्मीकि सिंह, वीसी पब्लिक स्कूल के प्रबंधक हेमंत मिश्र, डॉ. एके सिंह, कैलाश, गणेश शुक्ला, अगस्त मुनि तिवारी, कैप्टन एसके त्रिपाठी, डॉ. दिनेश मणि त्रिपाठी, जगदीश आनंद, अशोक कुमार जायसवाल, प्रदीप शुक्ला, अशोक कुमार वर्मा, समिति के उपाध्यक्ष हीरालाल यादव, इंदूशेखर पांडेय, राधेश्याम मौर्या, अजय कुमार मिश्र, उदय प्रताप मणि त्रिपाठी, अनिरुद्ध शर्मा, मीना त्रिपाठी, रुक्मिणी त्रिपाठी, सूर्य प्रकाश शर्मा, एपी शर्मा आदि ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए शपथ ली।