मतदान के प्रति नगर निगम के मतदाताओं की बेरुखी से पूरे जिले का रिकार्ड खराब हो गया। निकाय चुनाव के पहले चरण में सूबे में सबसे कम वोट गोरखपुर में पड़े। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले में सभी को भारी उत्साह दिखने की उम्मीद थी। जिले की नगर पंचायतों के मतदाता ने अपने-अपने बूथों पर उमड़ पड़े लेकिन नगर निगम के बूथों पर लंबी लाइन कुछ ही जगह वह भी कुछ ही समय के लिए दिखी। अब लगता है, जब फैसला करने की घड़ी आई तो प्रचार के दौरान नगर निगम के सभी प्रत्याशियों के दावे-प्रतिदावे तो चाव से सुनने वाले सौ में 64 मतदाता घरों से निकले ही नहीं। नतीजा यह हुआ कि निगम के 70 वार्डों में कुल 35.71 प्रतिशत ही वोट पड़े। पूरे जिले की वोटर संख्या और कुल पड़े वोटों पर गौर करें तो 39.42 प्रतिशत लोगों ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
छिटपुट घटनाओं और विवाद के बीच गोरखपुर नगर निगम और इसके 70 वार्डों में बुधवार सुबह 7:30 बजे से मतदान शुरू हुआ। शुरुआत से ही वोटरों में उत्साह देखने को नहीं मिला। कॉर्मल स्कूल के तीन बूथों पर बमुश्किल 10 प्रतिशत वोट पड़ सके। ज्यादातर वार्डों का कमोबेश यही हाल रहा। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर नगर निगम में आठ लाख 65 हजार 302 मतदाताओं को वोट डालना था लेकिन ज्यादातर मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे। मतदान प्रतिशत (35.71 प्रतिशत) के हिसाब से देखें तो तीन लाख 9 हजार 048 वोट ही पड़े। इसकी सूचना आयोग को भेजी जा चुकी है। कई वार्डों के कुछ बूथ ऐसे रहे, जहां महज ढाई प्रतिशत वोट पड़े। इससे पार्षद प्रत्याशियों के जीत-हार का अंदाजा लगा पाना कठिन हो गया। राजनीतिक दल और प्रत्याशी शहरी मतदाताओं की बेरुखी की वजह तलाशने में जुटे हैं। कुछ मतदान केंद्रों पर विवाद से भी मतदान का प्रतिशत कम हुआ।
ईवीएम में बंद प्रत्याशियों का भाग्य
नगर निगम के 13 मेयर और 682 पार्षद प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया है। वोटों की गिनती एक दिसंबर को होगी। आठ नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के 75 तो इनके 101 वार्डों से सदस्य के लिए सैकड़ों प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। नगर पंचायतों में मतदान मतपत्र से कराया गया है।
प्रशासनिक लापरवाही भी बड़ी वजह
मतदान प्रतिशत कम होने के पीछे प्रशासनिक मशीनरी की लापरवाही बड़ी वजह मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि जिला स्तर पर जन जागरूकता के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए। मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी ठीक से नहीं हुआ। नाम जोड़ने का काम बेहद खराब रहा। तमाम वोटर ऐसे मिले, जिन्होंने पिछली बार (वर्ष 2012) वोट दिए थे लेकिन इस बार सूची से उनके नाम गायब थे। मतदाता पर्ची बांटने में भी लापरवाही हुई। ज्यादातर मतदाताओं के पास पर्ची नहीं पहुंची।
सात नगर पंचायतों के वोटर फर्स्ट डिवीजन
सात नगर पंचायतों के वोटर फर्स्ट डिवीजन से पास हो गए। इन पंचायतों में जबरदस्त वोटिंग हुई और मतदान केंद्रों पर लंबी लाइनें देखने को मिलीं। राज्य निर्वाचन आयोग को जो आंकड़े भेजे गए, उसके मुताबिक आठ नगर पंचायतों में कुल 66.76 प्रतिशत वोटिंग हुई है। पीपीगंज में सबसे ज्यादा 73.33 प्रतिशत वोट पड़े। मुंडेरा बाजार में 72.88 प्रतिशत वोट पड़े हैं।
कहां-कितनी हुई वोटिंग
नगर पंचायत वोटिंग प्रतिशत
पीपीगंज 73.33
मुंडेरा बाजार 72.88
पिपराइच 67.79
गोला बाजार 67.51
सहजनवां 61
बांसगांव 60.52
बड़हलगंज 60.03
संग्रामपुर ऊनवल 59.04