वर्ष 2017 में सीएम से लक्ष्मीबाई पुरस्कार प्राप्त करती मंजूला पाठक
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गोरखपुर। खेल का मैदान हो, प्रशासनिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक मंच हो या सामाजिक सरोकार, बेटियों के नूर से हर क्षितिज जगमगा रहा है। बेटियां कहीं पसीना बहाकर देश का मान बढ़ा रही हैं तो कभी अपने खून से मानवता की नई इबारत लिख रही हैं। ‘बेटी दिवस’ पर कुछ ऐसी ही बेटियों से आपकी मुलाकात करा रहे हैं। यकीन जानिए, इनको आप भी कोहीनूर ही कहेंगे। ठीक वैसे ही जैसे नवाज देवबंदी कहते हैं... ‘एक आंखों के पास है एक आंखों से दूर, बेटा हीरा होता है तो बेटी कोहीनूर।’
जो मारते थे ताने आज उनके लिए नजीर
भारतीय महिला हैंडबाल टीम की कप्तान मंजूला पाठक की संघर्षों से भरी कहानी थक कर हार मान जाने वालों के लिए प्रेरणादायक है। मैदान पर उतरीं तो कपड़ों को लेकर गैरों के साथ-साथ पिता के भी विरोध का सामना करना पड़ा। मगर मां मंजू पाठक की प्रोत्साहन की बदौलत तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए मंजूला ने सभी का मुंह बंद कर दिया। शुरूआती प्रतियोगिताओं मेें ही बेहतर प्रदर्शन करने लगी तो पिता ने कभी ना टोकने की कसम खाई। लार के सजांव गांव के मूल निवासी और विशुनपुर कला इंटर कॉलेज में संस्कृत विषय के शिक्षक विनोबा पाठक की तीन संतानों में इकलौती बेटी आज भारतीय हैंडबाल टीम की रीढ़ है।
श्रेयांशी : नृत्य आराधना भी साधना भी
उम्र महज बारह साल, लेकिन जब वो मंच पर नृत्य करती हैं तो आंखें, चेहरा मानो सब बोल उठता हो। जिस मंच पर उतरीं, ताज उनके सिर सी सजा। गंगानगर स्थित बशारतपुर कॉलोनी में रहने वाली दसवीं की छात्रा श्रेयांशी श्रीवास्तव के लिए नृत्य महज कला नहीं बल्कि साधना है। पिता प्रवीर आर्य बताते हैं कि श्रेयांशी जब साल भर की थी तभी से डांस करने की कोशिश करती थी। समय के साथ उसने शास्त्रीय, लोक संगीत, बॉलीवुड के गानों पर नृत्य में महारत हासिल कर ली। हाल ही में संपन्न हुए गोरखपुर महोत्सव में लोकरंग कार्यक्रम में उद्घाटन नृत्य करने वाली श्रेयांशी पूर्वांचल महोत्सव समेत कई आयोजनों में प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। राज्यपाल राम नाइक और प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान के सामने प्रस्तुति देकर भी सराहना पा चुकी हैं।
पूनम मिश्रा: दूसरों की जान बचाने का जज्बा
10 नंबर बोरिंग के पास रहने वाले संजय मिश्र की पत्नी पूनम मिश्रा दो दशक से लगातार रक्तदान करती आ रही हैं। 12वीं में पढ़ने वाले बेटे पुलकित और छठीं की छात्रा बेटी सिमरन की परवरिश में व्यस्त होने के बाद भी जब किसी जरूरतमंद का फोन आया पूनम महादान करने हाजिर हुईं। वह कहती हैं कि किसी की जान बचाने से मिलने वाले संतोष का अहसास अद्भुत है। कॉलेज में रक्तदान शिविर से शुरू हुआ यह सिलसिला आज तक जारी है।
बेटियों को दी और ताकत
यूपी सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी करके बेटियों को ताकत दी है। किसी भी समय डॉयल 100, 1090, 181 पर फोन करके पुलिस की मदद ली जा सकती है। कॉल करने वाली बेटियों की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाती हैं।
पावर एंजिल : हर स्कूल, कॉलेज और मोहल्ले में महिलाओं को इससे जोड़ा जा रहा है। मकसद है कि आसपास होने वाली गलत गतिविधियों की समय से जानकारी हो सके।
एंटी रोमियों स्क्वॉड : भीड़ वाले इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाकर मनचलों पर शिकंजा कसने की पहल। मनचलों को पकड़कर उनके घरवालों को करतूत बताई गई और फिर भी नहीं सुधरते तो कार्रवाई होती है।
केक काटकर मनाएंगे बेटियों का जन्मदिन
गोरखपुर। आशा ज्योति केंद्र की तरफ बृहस्पतिवार को जिला महिला अस्पताल में राष्ट्रीय बेटी दिवस के उपलक्ष्य बेटियों का जन्मदिन मनाया जाएगा। इस समय अस्पताल में 28 बेटियां हैं। केंद्र की प्रबंधक पूजा पांडेय ने बताया कि डीएम के विजयेंद्र पांडियन बेटियों को जन्म प्रमाण पत्र भी देंगे। केक भी काटा जाएगा।