हम कैसे सपने देखें यह भी बाजार तय कर रहा : पवन
- गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल का हुआ आगाज, पहले दिन दिखाई गईं छह दस्तावेजी फिल्में
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। समानांतर सिनेमा के प्रमुख स्तंभ मृणाल सेन की याद और हाशिए के लोगों को समर्पित 13वें गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ का आगाज शनिवार को हो गया। उद्घाटन समारोह में युवा फिल्मकार एवं ‘लाइफ आफ एन आउटकास्ट’ के निर्देशक पवन श्रीवास्तव ने कहा कि सिनेमा जैसे माध्यम पर चंद लोगों का कब्जा है। आज बाजार हम क्या खाएं, क्या पहनें ही नहीं बल्कि हम कैसे सपने देखें, यह भी तय कर रहा है। बाजार के इसी एकाधिपत्य से मुक्ति के लिए जरूरी है कि सिनेमा को जन सहयोग से बनाने और दिखाने का माध्यम बनाया जाए। ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ ऐसा ही मंच है।
समारोह में ‘अपनी धुन में कबूतरी’ के निर्देशक संजय मट्टू ने कहा कि फिल्मकारों का दर्शकों से रूबरू होना जरूरी है। अब तक सामान्य फिल्में व मीडिया वही दिखाते थे जो वह दिखाना चाहते थे। लेकिन इस तरह के आयोजन से यह पता चलता है कि दर्शक फिल्मों के विषय वस्तु से क्या-क्या अर्थ निकालते हैं।
प्रतिरोध के सिनेमा के राष्ट्रीय संयोजक संजय जोशी ने बताया कि गोरखपुर से 2006 में शुरू हुए ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ के देश में अब तक 68 फिल्म फेस्टिवल हो चुके हैं। जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष कवि कौशल किशोर ने कहा कि गोरखपुर में 13 वां फिल्म फेस्टिवल ऐतिहासिक है। स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष कथाकार मदन मोहन ने किया। संयोजक मनोज कुमार सिंह ने फेस्टिवल में शिरकत करने आये फिल्मकारों को धन्यवाद दिया। संचालन गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ. चंद्रभूषण अंकुर ने किया।
उद्घाटन समारोह में हैदराबाद की संगीत टीम होई चोई के म्यूजिक वीडियो ‘एक गीत’ और ‘एक देश बड़ा कब बनता है’ को लोगों ने खूब सराहा। ये वीडियो कवि लाल्टू के गीतों पर बने हैं। इसके साथ छह दस्तावेजी फिल्म, दो फीचर फिल्म, एक बाल फिल्म और लघु फिल्म दिखाई गईं।
ये फिल्में दिखाई गईं
भुवन शोम : फिल्म निर्देशक मृणाल सेन की याद में उनकी फिल्म ‘भुवन शोम’ दिखाई गई। यह मृणाल सेन की पहली हिंदी फिल्म थी।
अपनी धुन में कबूतरी : उत्तराखंड की लोक गायिका कबूतरी देवी पर बनी संजय मट्टू निर्देशित दस्तावेजी फिल्म विरासत पर ध्यान खींचा।
नाच भिखारी नाच: लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की कला को समझाती दस्तावेजी फिल्म में निर्देशन शिल्पी गुलाटी और जैनेन्द्र दोस्त का था।
लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट: पवन श्रीवास्तव निर्देशित यह फिल्म एक पिछड़े और गैर सवर्ण परिवार के लगातार उखड़ने की कहानी है।
पुस्तक प्रदर्शनी भी लगी
जन संस्कृति मंच के घुमंतू पुस्तक प्रदर्शनी के साथ प्रेमचंद साहित्य संस्थान, सावित्री बाई फूले पुस्तकालय के स्टॉल भी लोगों की भीड़ रही।
आज दिखाई जाएंगी ये फिल्में
फर्दीनांद, अद्धा टिकट, हू इज तापसी, गुब्बारे, दोज स्टार्स इन द स्काई, परमाणु ऊर्जा-बहुत ठगनी हम जानी, लैंडले, लिंच नेशन