गोरखपुर। आठ दिनों से जारी लेखपालों की हड़ताल ने हजारों लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। निर्वाचन, पेंशन, जमीन आदि से जुड़े मामलों का सत्यापन तो लटका ही है तमाम छात्रों का कॅरिअर दांव पर है। कई लोगों को वजीफे की चिंता सता रही है।
जिले में 14 हजार से ज्यादा जाति, आय प्रमाण पत्र के आवेदन फंसे हुए हैं। हर तहसील में दो हजार या उससे अधिक आवेदनों को लेकर आवेदक चक्कर लगा रहे हैं। पूरे प्रदेश में 25 जून से अभी तक करीब दो लाख प्रमाण पत्रों के आवेदन लंबित पड़े हैं। प्रवेश का सीजन होने से लेखपालों की हड़ताल से सर्वाधिक परेशान विद्यार्थी हैं। डिजिटल सर्टिफिकेट की व्यवस्था लागू होने के बाद बहुत चिरौरी करने पर किसी तहसील से मैनुअल प्रमाण पत्र जारी भी हो जा रहा है तो शिक्षण संस्थान स्वीकार नहीं कर रहे।
चिंता जताते ही और बढ़ गया मर्ज
प्रमाणपत्रों के बनने में देरी की वजह से प्रवेश और छात्रवृत्ति में आ रही दिक्कतों को लेकर शासन ने पहले ही चिंता दिखाई थी। 19 जून 2018 को अपर मुख्य सचिव चंचल कुमार तिवारी ने सभी डीएम को निर्देश जारी किए थे कि विद्यार्थियों की तरफ से आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के जमा किए जाने वाले आवेदनों को गंभीरता से लिया जाए। उन्हें 15 के बजाए सात दिन में ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
सचिवों ने भी किया इंकार
शासन ने ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम्य विकास अधिकारियों से प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कहा था। लेखपाल संघ के मंत्री जगदीश के मुताबिक दोनों संगठनों के प्रदेश नेतृत्व ने शासन को पत्र जारी कर इस जिम्मेदारी को उठाने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उनके पास पहले ही बहुत काम हैं।